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पालघर में संतों की हत्या महाराष्ट्र सरकार पर प्रश्नचिन्ह........................

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

(वरिष्ठ पत्रकार)


 आज पूरा भारत जानना चाहता है पालघर में जूना अखाड़ा के दो संतो की जिस तरह पुलिस के होते हुए वहां के नागरिकों ने लाठी-डंडों से पीट-पीटकर जिस तरह से निर्दयता पूर्वक हत्या की जिसका पूरा देश निंदा करता है । तथा देश मांग करता है इन हत्यारों को जिन लोगों ने जूना अखाड़े के  संतो को जिस तरह निर्दयता पूर्वक निर्दयता पूर्वक हत्या की है वह वास्तव में महाराष्ट्र सरकार को कलंकित किया है बड़े अफसोस की बात है वाला एक ऐसे हिंदू योद्धा महाराष्ट्र क बाला साहब  बाल ठाकरे जी जो एक महाराष्ट्र में एक बहुत बड़ी ताकत है जिन्होंने हिंदुत्व को ध्यान में रखा और कभी भी उन लोगों से समझौता नहीं किया सत्ता लोग के कारण जो लोग देश के विकास के क्षेत्र उनका श्रेय कम रहा है सिर्फ जात पात के आधार पर एक धारणा बना कर कार्य करने वाले दल से हमेशा बाल ठाकरे जी ने दूरी बनाकर रखी परंतु उनके पुत्र उधव ठाकरे आज सरकार बनाने के लिए उन्होंने एनसीपी और कांग्रेस का समर्थन लेकर 30 वर्षों पुरानी अपनी सहयोगी और दोस्ती की मिसाल को 30 वर्ष पुराने रिश्ते को तोड़ दिया और भारतीय जनता पार्टी से अलग हो गई आज साधुओं की हत्या पर पूरा देश जानना चाहता हैसाधुओं की निर्मम हत्या पर देश महाराष्ट्र कार से जवाब चाहता है और दोषियों को कठोर से कठोर सजा मृत्युदंड प्राप्त हो।पालघर में पंच दशनाम जूना अखाड़ा के दो संतों समेत तीन लोगों की लाठी-डंडे से पीटकर की गई हत्या पर संत समाज में उबाल आ गया है। अखाड़ों व अन्य संतों ने इस घटना की सीबीआई जांच की आवाज उठाई है। 

पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव महंत यमुना पुरी एवं महंत रामसेवक गिरि ने संतों की निर्मम हत्या की सीबीआई जांच की मांग की। इसी तरह किन्नर अखाड़ा ने घटना की कडे़ शब्दों में निंदा की।किन्नर अखाड़ा के आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, उत्तर भारत की प्रभारी महामण्डलेश्वर भवानी मां, प्रयागराज की महामण्डलेश्वर स्वामी कौशल्या नंद गिरि ने पालघर में दो संतों की पुलिस की मौजूदगी में हत्या की निंदा करते हुए कहा कि घटना की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ शीघ्र सख्त कार्रवाई की जाए। जय शिवसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री ओंकार नाथ त्रिपाठी ने भी महाराष्ट्र में जूना अखाड़े के संतों की हत्या पर दुख जताया। इसी तरह अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के राष्ट्रीय संरक्षक जगद्गुरु स्वामी महेशाश्रम महाराज ने पालघर हत्याकांड को कलंक का टीका बताया। पंच दशनाम आवाहन अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री महंत सत्य गिरि महाराज ने चेताया कि हजारों नागा साधु महाराष्ट्र सरकार का घेराव करने को तैयार हैं। दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो परिणाम भुगतना होगा। मां कामाख्या संस्थान के गृहस्थ संत संकर्षण महाराज ने इस घटना पर चिंता जताई। कहा कि ऐसे आताताइयों को सबक सिखाया जाना चाहिए। पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाणी, कीडगंज में बैठक के उपरांत यह निर्णय लिया गया कि सरकार कार्रवाई करे, वरना संत समाज सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य होगा।  स्वामी तूफान गिरि महाराज व पंच निर्मोही अखाड़े के महंत राजेंद्र दास महाराज ने घटना निंदा की। द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने महाराष्ट्र में दो संतों की हत्या पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से इस हत्या की घटना को अंजाम दिया गया, वह बेहद ही निंदनीय और चिंताजनक है। महाराष्ट्र सरकार को इस मामले में त्वरित गति से कदम उठाना चाहिए ताकि संत समाज की नाराजगी दूर हो सके।  राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने सोमवार को महाराष्ट्र की घटना पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस तरह की कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृति रोकी जा सके। भारत एक विशाल देश है इस विशाल देश में आज जिस तरह महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की हत्या हुई अगर अन्य इसी धर्म की कुछ हुआ होता तो सरकारें बड़ी तेजी से कार्य करती हूं और दोषियों को ढूंढ लेती है परंतु यह मामला देश के सबसे बड़े लोकतंत्र में संतों और साधुओं का है जिस पर कोई भी कड़ी कार्रवाई महाराष्ट्र सरकार द्वारा अभी तक नहीं की क्योंकि वह गठबंधन की सरकार में उधव ठाकरे स्वयं असहाय उन्हें अपने पिताजी के वचनों को ध्यान में रखते हुए सरकार शिवसेना की मुख्यमंत्री बनने की इच्छा उनके पिताजी के सपनों को साकार किया परंतु क्या बाला साहब ठाकरे जी यह कहकर थोड़ी गए थे शिवसेना का पतन हो रहा है इतनी जल्दी इतने उतावले उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री के लिए क्यों रहे क्या उन्हें एहसास हो गया यह शिवसेना महाराष्ट्र में पतन की ओर है जल्दी से जल्दी पिताजी के सपनों को मुख्यमंत्री के रूप में कांग्रेश और एनसीपी से गठबंधन बनाकर मुख्यमंत्री बन जाए नहीं आगे स्थित क्या हो बन पाया ना बन पाए इसलिए मौका गवाना नहीं है चाहे साधुओं की हत्या हो जिस नाम से शिवसेना का देश में नाम था अब वह शिवसेना का अस्तित्व धीरे धीरे जिस तेजी के नाम से जाने जाते थे अब धीरे-धीरे जनता के दिलों से शिवसेना का मोह भंग होता जा रहा है और शिवसेना धीरे धीरे अपने पतन की ओर अग्रसर है वह दिन दूर नहीं जब शिवसेना के चंद्र लोगी उनकी पार्टी के सामने क्योंकि जिस नाम से यह धारणा से शिवसेना की पहचान की वह आज समाप्त होती नजर आ रही है।

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