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देश में कोरोना से आर्थिक भरपाई वर्षों तक.......... देवेश प्रताप सिंह राठौर( वरिष्ठ पत्रकार)

...आज पूरा विश्व के साथ भारत की अर्थव्यवस्था कोरोना वायरस के कारण खराब हो रही है आप समझ सकते हैं जो वर्तमान समय जिस स्थित से गुजर रहा है वह स्थित निदान पाने के बाद कई एक बार लगेंगे देश की स्थित को आर्थिक रूप से मजबूत होने के लिए। आप आज समझ सकते हैं इस तरह से कोरोना वायरस द्वारा पूरा विश्व हिल गया है वहीं पर चीन जैसा वायरस फैलाने वाला देश उसे बिल्कुल ही विश्व समुदाय का कतई ध्यान नहीं है वह अपनी ताकत और टेक्नोलॉजी से अपने घमंड में किसी को नहीं सुनता है। आज आर्थिक रूप से भारत देश के साथ मजबूत देश आज आर्थिक रूप से वह भी धीरे-धीरे कमजोर होने की स्थिति में कोरोना वायरस के कारण परेशान हो रहे हैं।स्वतंत्रता पूर्व की भारत की जड़ीभूत, गतिहिन अर्थव्यवस्था को आजादी के बाद योजनाबद्ध आर्थिक कार्यक्रम द्वारा गतिशील बनाने का प्रयास किया गया है | फलस्वरूप औद्योगिक संरचना का सुदृढ़ आधार तैयार हुआ है, विदेशी व्यापार में 90 गुना वृद्धि हुई थी | कृषि में हरित क्रांति द्वारा उपज में तेजी से वृद्धि हुई है, परिवहन व संचार व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं | पिछले 13 वर्षों में लागू किए गए आर्थिक सुधारों से नवीन तकनीक का प्रयोग बढ़ा है | भारत के निर्यात एवं विदेशी पूंजी भंडार में वृद्धि हुई है और भुगतान संतुलन में अनुकूलता मिली है, इसके बावजूद आजादी की अर्ध शताब्दी गुजर जाने के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था की कुछ समस्याएं जवलंत बनी हुई है जिन पर प्रत्येक भारतीय को गंभीरता से विचार करना चाहिए |
"गरीबी हटाओ" और "आत्मनिर्भरता" के सुखद सपनों के महल आर्थिक पेचीदगियों के झंझावातों में ढह रहे हैं | देश दिशा-शुंन्य स्थिति में बढ़ रहा है, हर व्यक्ति परेशान है, महंगाई, बेरोजगारी, मुद्रास्फीति, काले धन और भ्रष्टाचार से जन-जन परेशान है तथा शोषण, अधिनायकवाद, अराजकता एव अपराधीपन के कारण व्यापक असंतोष के लक्षण नजर आ रहे हैं | देश के अधिकतर नीति-निर्माता, सत्ता- लोलुप, भ्रष्ट और विवेकहिन है, अत: भारतीय अर्थव्यवस्था की न केवल दुर्दशा है बल्कि दिशाशुंन्यता भी है इसलिए हमारी अर्थव्यवस्था की समस्याओं का वस्तुगत विश्लेषण आवश्यक है | हमें विचार करना है कि ए.एम. खुसरो का यह कथन हमारे लिए कैसे सार्थक होकी " 19 वी सदी ब्रिटेन की थी, 20 वी सदी अमेरिका की है और 21 वी सदी भारत के नाम लिखी जाएगी |"  दरअसल आज हमारी अर्थव्यवस्था की तत्कालीन चुनौतियों में सबसे ऊपर तो निरंतर बढ़ती – "बेरोजगारी" है | औद्योगिक मंदी हमें घेरती जा रही है, रुपया एक पतन सील मुद्रा के रूप में गिरता जा रहा है, निर्यात दर की गिरावट जारी है, ज़िद्दी राजकोषीय घाटा है, सैकड़ों फरमाइशो के साथ रूठे बैठे उद्योग चेंबर है और नियंत्रित मुद्रास्फीति के आंकड़ों के बावजूद क्रय-शक्ति के अभाव में जूझ रही गरीब जनता है | संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम रिपोर्ट के अनुसार हम 175 देशों में 124 वे से खिसककर 127 वे स्थान पर पहुंच गए हैं | दुनिया के सर्वाधिक लगभग 25 करोड़ भूखे लोग भारत में ही है, 4 करोड़ बच्चे शिक्षा से वंचित है | वैश्वीकरण और उदारीकरण की पैरवी करने वाले हमारे नीति-निर्धारकों के लिए अर्थव्यवस्था की यह तस्वीर उसके संपूर्ण ढांचे तथा समस्या के महत्वपूर्ण पक्षों को समझे और आज आर्थिक रूप से कितना नुकसान हो रहा है और सब आंकड़े मौजूद है वह आप देख सकते हैं। चीन एक ऐसा देश है विश्व समुदाय अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में और विश्व स्वास्थ्य संगठन के माध्यम से पूरा विश्व जो जो पकोरोना से ग्रस्त हैं वह सब जितना नुकसान हो रहा है उसकी भरपाई के लिए चीन के ऊपर दबाव बनाया जाए और चीन से पूरा विश्व उससे सामान लेना बंद कर दे क्योंकि चीन जैसा गद्दार देश पीठ पर छुरा भोक्ता है उस पर विश्वास किया जाना कहीं तक न्याय उचित नहीं है। विश्व समुदाय यह देख रहा है चाइना ने किस तरह झूठ को दबा कर रखा और आज पूरा देश जैसा रहा जहां पर था वहीं पर रुक गया है विकास ही गत फिल्म रूप चाहिए सरकारी तंत्र बैठ गया है क्योंकि कोरोनावायरस एक गंभीर विषय है गंभीर बीमारी है जिसके हित के लिए सभी देशों ने आर्थिक नुकसान को सहा और लॉक डाउन को अपनाया जिससे आर्थिक में जो नुकसान होगा लेकिन हमारे देश के नागरिक उनकी जान बहुत कीमती है जान है तो जहान है यह इससे भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सही समय पर लॉक डाउन कर कहां जान है तो जहान है और विश्व के आंकड़ों के हिसाब से महा शक्तियों के आंकड़ों से भारत के प्रधानमंत्री आज के स्थित में विश्व में अच्छे लोगों में अच्छे प्रधानमंत्री के रूप में प्रथम पायदान पर हैं यह है भारत के लिए के  बड़ी गर्व की बात है। क्योंकि मोदी हैं तो कोई भी चीज नामुमकिन नहीं है देश को विश्वास है कि हमारा देश का मुखिया हमें इस संकट की घड़ी से जल्दी से जल्दी निजात दिला पाएगा और आर्थिक रूप से हम कहीं और अधिक अच्छे तरीके से विकसित होंगे और इससे हुए नुकसान को हम सब देशवासी मिलकर शीघ्र भरपाई कर लेंगे हमें सबसे पहले कोरोना वायरस को बढ़ाना है उसके बाद भारत आर्थिक रूप से देश की जनता के कार्यशैली भरोसे पर मजबूत तौर पर हम आगे बढ़ेंगे। भारत 1 महीने से ऊपर हो गया है लॉक डाउन के बाद भी मरीजों की कोरोनावायरस यह मरीजों में कमी नहीं आ रही है कब तक लॉक डाउनलोड होगा यह कहना बड़ा मुश्किल है क्योंकि आज की स्थिति को देखते हुए लॉक डाउनलोड बढ़ाया जाएगा क्योंकि लॉक टाउन खोलने पर हिंदुस्तान का नागरिक सोशल डिस्टेंस एवं उसके दिए गए दिशा निर्देश पालन नहीं कर पाएगा झुंड बना बना कर रोडो पर फैलने लगेंगे इसलिए अर्थव्यवस्था की स्थिति खराब होगी परंतु लोग धाम से जो देश माहवारी से बच जाएगा क्योंकि भारत में सीधी बात समझने वाले बहुत कम है अधिकतर कानून तोड़ने वाले लोग अपना स्वाभिमान समझते हैं जिस कारण यहां पर लॉक डाउन खत्म होने की स्थित में नहीं है अगर सरकार ने लॉक डाउन हटा दिया तो देश की एवं राज्यों की स्थित बड़ी गंभीर हो जाएगी जब आज लॉक डाउन है तब यह हाल है कहीं लॉक डाउन हट गया तो क्या होगा यह आप समझदार व्यक्ति भारत की स्थिति को देखकर समझ सकता है

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