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कानपुर:- कारगिल पार्क स्थित मोतीझील का दायरा बहुत जल्द दोगुना,लॉकडाउन हटते ही तेजी से पूरे होंगे अधूरे काम, दोनों छोर से दिखेगी मोतीझील

कारगिल पार्क स्थित मोतीझील का दायरा बहुत जल्द दोगुना होने वाला है। नगर निगम ने दो भागों में बंटी इस झील को जोड़ने का काम लॉकडाउन से पहले ही तेजी से शुरू करा दिया था। झील को दो हिस्से में बांटने वाले पैदल मार्ग के बीच में फुट ओवर ब्रिज बनाने के लिए ढांचा खड़ा करा दिया गया है। वहीं, पार्क में किड्स जोन और दूसरा ओपन जिम बनकर तैयार हो गया है।
आमजा भारत कार्यालय संवाददाता:- किड्स जोन में झूले के साथ जिम में सारे उपकरण भी लग गए हैं। अभी इन्हें ढककर रखा गया है। लॉकडाउन हटने के बाद अधूरे कामों को पूरा कराया जाएगा। दो बराबर हिस्सों में बंटी मोतीझील के प्रत्येक हिस्से की लंबाई करीब 600 मीटर और चौड़ाई 105 मीटर है। प्रवेश द्वार के दाहिनी ओर के हिस्से में झील में पानी भरा है।

इसी हिस्से में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा लगी है। झील के दूसरे छोर पर फिलहाल कीचड़ और हल्का पानी है। इसमें कमल के फूल झाड़ियां व पौधे उगे हुए हैं। स्मार्ट सिटी अंतर्गत दो करोड़ से अधिक की लागत से पार्क का सुंदरीकरण कराया जा रहा है। इसी कड़ी में झील के दोनों छोर को जोड़कर शहर वासियों को वाटर स्पोर्ट्स की सौगात देने की तैयारी है। नगर निगम के उद्यान अधिकारी वीके सिंह के मुताबिक लॉकडाउन के कारण काम रुका हुआ है। अनुमति मिलते ही अधूरे कामों को तेजी से पूरा कराया जाएगा।

झील के किनारे नहीं आ रहीं मछलियां, मिल रहा प्राकृतिक भोजन
लॉकडाउन के कारण मोतीझील के कारगिल पार्क में जितना सन्नाटा है, उतनी ही शांति यहां की झील के पानी में भी है। महामारी से पहले जब पार्क में चहल-पहल रहती थी तो झील के पानी में भी हलचल बनी रहती थी। इसकी वजह थीं झील की मछलियां और बतखें। पार्क आने वाले लोग इनको आटा या चारा खिलाते थे।

इससे मछलियां झील के किनारे ही दिखती थीं। वर्तमान में झील में लबालब पानी होने के बावजूद मछलियां किनारे या ऊपर नहीं आ रही हैं। काफी देर के इंतजार के बाद इक्का-दुक्का मछलियाें की हलचल देखने को मिलती है। बतखें भी नगर निगम की ओर से दिए जाने वाले दाने को खाने के लिए निर्धारित समय पर ही मुख्य द्वार पर आती हैं।

अन्यथा झील के आखिरी छोर पर झुंड में रहती हैं। कानपुर प्राणी उद्यान के प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके सिंह के मुताबिक मछलियों को प्राकृतिक भोजन पानी में मौजूद शैवाल, पौधों, पत्तियों, कीड़े-मकोड़ों आदि से मिल जाता है। मानवीय गतिविधियां थमने के कारण वर्तमान समय में सभी पशु-पक्षियों को उनका प्राकृतिक भोजन मिल पा रहा है। यह पर्यावरणीय संतुलन के लिए जरूरी है।

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