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कोरोना को लेकर गांवों में बरती जा रही ज्यादा सावधानी

गांवों में लोग अंजान व्यक्ति को बर्तन में पानी पिलाने से कतरा रहे 
शहर में बार-बार किया जा रहा है लाक डाउन का उल्लंघन 
  
कमासिन, के0 एस0 दुबे । बांदा। सिर्फ एक ही फूंक काफी है कतार के दीपक बुझाने के लिए, और यह दीपक पर है कि वह बुझता है या जलता है। तूफानों में रोशन अंधेरों से, वही दीपक लड़ता है हौसले की जिसमें बाती है और जो कतार से हटकर जलता है। करोना वायरस वैश्विक महामारी की न तो दवा है न ही इलाज है। महज बचाव ही रास्ता है। इस महामारी की आपसी लोगों की दूरी ही दवा है। इस महामारी से बचाव को लेकर शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा गांव देहात के लोग बेहद सावधानियां बरत रहे है। इतने संजीदा है कि गांवों में लोग किसी अनजान आदमी को अपने बर्तनों में पानी पिलाने से भी कतराने लगे हैं।
कमासिन क्षेत्र में खरीददारी को निकले लोग
करोना वायरस से फैली वैश्विक महामारी से अब तक लाखों लोग जान गवा चुके हैं। लाखों लोग जिंदगी और मौत जूझ रहे हैं। इस महामारी से बचाव नियमो का जिसने इसका पालन किया वही सुरक्षित है। वर्तमान में शहरों की अपेक्षा गांव देहात में इसके पालन में काफी अंतर नजर आता है। शहरी क्षेत्रो में लाक डाउन दौरान बचाव हेतु बने नियमों के प्रति लोग कम संवेदनशील दिखाई देते है। जबकि इस वैश्विक महामारी के प्रति गांव देहात का हर व्यक्ति इसका पालन बड़ी ही सावधानी के साथ करता नजर आता है।इस महामारी से शायद देहात इसलिए बचे हुए हैं कि गांव घरों के लोग इस महामारी के प्रति बहुत संजीदा हैं। इस बात का उन्हें भय है कि यह महामारी अगर हमारे गांवों तक पहुंची तो स्थिति भयावह होगी क्योंकि कस्बो गांवों के अस्पतालों में सुविधा विहीन होने के कारण इसका इलाज नामुमकिन हो जाएगा। ऐसी स्थिति में गांवों के बाशिंदे बहुत ही सावधानी पूर्वक रह कर सुरक्षित जीवन यापन के प्रति चिंतनशील  हैं। क्वारंटीन किए गए बाहर से आए  व्यक्तियों ने आपस में एक दूसरे से सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर बड़ी समझदारी से इस महामारी से बचाव करते हुए दिखाई दिए। किसानों से जुड़े मजदूरों द्वारा फसल कटाई से लेकर अन्य कृषि कार्यों मे महामारी बचाव नियमों का सावधानीपूर्वक पालन किया जा रहा है। गांवों के लोगों के बीच में बचाव हेतु न तो मास्क पहुंचे न ही सैनिटाइजर। फिर भी वो साबुन से ही हाथों को बार-बार धुल कर बचाव करने का प्रयास करते नजर आते हैं। लेकिन गांवों में गमछा बहुतायत लोगों द्वारा रखा जाता है और उसका भरपूर उपयोग मुंह में लोग बांधकर इस संकट कॉल में मास्क का काम ले रहे हैं।कमासिन क्षेत्र के गांव खरौली के फूल सिंह, इटर्रा निवासी ओमप्रकाश, राघौपुर के कैलाश यादव प्रधान, आदि ने बताया कि गांवों के लोग किसी भी अन्जान परदेसी को अपने बर्तनों से पानी पिलाने से किनारा कसते हैं।लोगों को कोरोना का भय सता रहा है कि कहीं कोरोना वायरस घर में ना दस्तक दे दे। देहातों में लोग बड़ी संवेदनशीलता के साथ करोना महामारी से निपटने के लिए घरों में हर संभव सतर्कता बरत रहे हैं। ज्यादा से ज्यादा लोग अपने घरों के अंदर रहने का प्रयास करते हैं। यहां तक कि सभी आपस में एक दूसरे को कहते रहते हैं कि घर के अंदर रहकर इस बैश्विक महामारी से अपनो के साथ परिवार का बचाव करना मुमकिन है। 

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