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Sunday, April 26, 2020

नाव डूबने से दरोगा व सिपाही समेत तीन की मौत

14 घण्टे बाद एनडीआरएफ व पीएसी की मशक्कत से निकाला जा सका शव
  
फतेहपुर, शमशाद खान । लॉकडाउन के दौरान नदी की सीमाओं पर गश्त पर निकले दरोगा सिपाही की नाव पलटने से डूबकर मौत हो गयी। किशनपुर थाने में तैनात उपनिरीक्षक रामजीत को पड़ोसी जनपद बाँदा से नदी के रास्ते कुछ लोगो के जनपद में घुसने की सूचना मिली थी। जिस पर हमराही सिपाही शशिकांत, निर्मल यादव एवं नाविक रवि नाव में सवार होकर निगरानी को निकले थे। तभी खराब मौसम व तेज हवाओं के कारण नाव अनियंत्रित होकर पलट गयी। गहराई अधिक होने के कारण दरोगा व सिपाही उसमे फंस गये। हमराही सिपाही निर्मल यादव किसी तरह तैरकर बाहर आया और लोगांे को नाव डूबने की जानकारी दी। पुलिस कर्मियों के डूबने की सूचना पर हड़कम्प मच गया। घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी संजीव सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रशांत वर्मा सहित कई थानों का पुलिस फोर्स मौके पर पहुंचा। लापता की तलाश में घंटों रेस्क्यू अभियान चलाया गया। गहराई अधिक होने के
घटनास्थल पर लगी बचाव राहत टीम।
कारण लगभग चैदह घंटों की मशक्कत के बाद बचाव कार्य में लगी पीएसी व एनडीआरएफ की टीम ने तीनों शवो को बाहर निकाला। खागा विधायक कृष्णा पासवान ने भी रेसक्यू अभियान चला रही टीम से जानकारी ली। उपनिरीक्षक रामजीत भारती (52 वर्ष) जौनपुर जिले के मछलीशहर के निवासी है। जबकि सिपाही शशिकांत (25 वर्ष) गाजीपुर जनपद के खजुहा गांव निवासी हैं। उपनिरीक्षक रामजीत का तबादला सात महीने पहले ही जनपद में हुआ था और उनकी तैनाती किशनपुर थाने में की गई थी। वही नाविक रवि (27 वर्ष) स्थानीय मछली ठेकेदार के यहाँ काम करता है। दरोगा व सिपाही के साथ नाविक की मौत होने से महकमा हतप्रभ है। घटना की जानकारी मिलते ही आईजी रेंज कवींद्र प्रताप सिंह ने पुलिस लाइन पहुंचकर दोनों पुलिस कर्मियो के शोकाकुल परिवारों को ढांढस बंधाया और डीएम संजीव सिंह, एसपी प्रशांत वर्मा सहित अन्य अधिकारियो ने शहीद पुलिस कर्मियों को गार्ड ऑफ ऑनर देकर गृह जनपद के लिये नम आँखों से विदाई दी।

सुरक्षा उपकरण के बिना टीम को क्यों किया रवाना
फतेहपुर। नदी सीमा पर गश्त को निकले दरोगा रामजीत, सिपाही शशिकांत एव नाविक रवि की मौत ने सवाल खड़े कर दिए है। नियमानुसार नदी क्षेत्र में गश्त के लिये जाने वाली टीमो को प्रशिक्षित होना चाहिये था और गश्त के लिये लाईफ जैकेट के साथ रवाना किया जाना चाहिये था। बिना सुरक्षा उपकरण के पुलिस टीम को गश्त के लिये किसके आदेश और क्यों
रवाना किया गया। आईजी रेंज कवींद्र प्रताप सिंह द्वारा इस बाबत भले ही जांच कराने की बात कह रहे है लेकिन दो पुलिस कर्मियों की मौत के बाद भी विभाग मामले की लीपापोती में जुट गया है। वहीं नाव डूबने से नाविक की मौत ने भी अनेक सवाल खड़े कर दिए है।

गार्ड आफ आॅनर के साथ नम आंखों से दी विदाई 
फतेहपुर। जैसे ही शहीद दोनों पुलिस कर्मियों दरोगा रामजीत, सिपाही शशिकांत का शव पुलिस लाइन पहुँचा तो पुलिस अधीक्षक प्रशांत वर्मा, अपर पुलिस अधीक्षक राजेश यादव व क्षेत्राधिकारी कपिलदेव मिश्रा द्वारा शव को कंधा दिया गया और राजकीय सम्मान के साथ पुष्प अर्पित किया गया। पुलिस कर्मियों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। दरोगा रामजीत जौनपुर जिले के मछलीशहर के रहने वाले हैं। जबकि सिपाही शशिकांत गाजीपुर जिले के खजुहा गांव के निवासी हैं। सात माह पहले ही उपनिरीक्षक रामजीत का तबादला जनपद में होने के बाद किशनपुर थाने में तैनात किया गया था। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद दोनों शहीद पुलिस कर्मियों के शव को राजकीय सम्मान से ग्रह जनपद रवाना किया गया।

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