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कोरोना संकट में मददगार बनी आधी आबादी

महिला संस्था वनागंना दे रही विधवा व एकल महिलाओं को निवाला
शहर के 6 क्षेत्रों और 15 गांवों में बांट रहीं राहत किट 
सोशल डिस्टेंसिंग के लिए भी लोगों को कर रहीं जागरूक 
 
बांदा, के0 एस0 दुबे । एक ओर वैश्विक महामारी के चलते जहां पुरुष गरीबों की राशन सामग्री व भोजन बांट रहे हैं वहीं आधी आबादी कही जाने वाली महिलाएं भी राहत पहुंचाने के लिए आगे आई हैं। जनपद में बालिका शिक्षा व घरेलू हिंसा जैसे मुद्दों पर काम कर अपनी पहचान बना चुकी महिला संस्था वनांगना अब गरीब विधवा व एकल महिलाओं तक राशन सामग्री किट पहुंचा रही है। शहर की कई बस्तियों के अलावा जिले के 15 गांवों में महिला स्वयंसेवी मदद पहुंचा रही हैं। 
वनांगना की जिला समन्वयक शबीना मुमताज का कहना है कि देश में लाकडाउन 3 मई तक और बढ़ा दिया गया है। दुकानें बंद हैं, लोग अपने-अपने घरों में रह रहे हैं और आमदनी का जरिया भी बंद है। ऐसे में गरीब और मजदूर तबके के सामने भोजन का संकट आ गया है। वहीं एकल महिलाओं के पास कोई दस्तावेज न होने की वजह से वह सरकारी राहत योजनाओं से वंचित रह रही हैं। कई गरीब परिवारों की हालत भी अच्छी नहीं है। ऐसे में वनांगना संस्था इन समुदायों और महिलाओं को राहत किट बांट रही है। 
समूह का नेतृत्व कर रहे अवधेश गुप्ता ने बताया कि 50 किलो की राहत किट तैयार की गई है। इसमें 35 किलो आटा, चावल के साथ प्रोटीनयुक्त दालें, तेल नमक, मसाले, साबुल, मंजन, पाउडर इत्यादि है। लोगों से मास्क लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की भी अपील की जा रही है। 
राशन किटों के साथ खड़े गरीब और असहाय लोग

इन गांवों में बांटा गया राशन
बांदा। महिला संस्था वनांगना द्वारा शहरी क्षेत्र के चुना भट्टी कालोनी, हरदौली घाट कालोनी, वाल्मीकि बस्ती, मर्दननाका, गुलाब बाग व खूंटी चैराहा सहित जिले के जमवारा, लहुरेटा, पुकारी, दशरथ पुरवा, शंकर बाजार, गिरवां, बदौसा, कोर्रही, हस्तम, नागवारा, जौरही, अतर्रा, नरैनी, नगनेधी इत्यादि गांवों में राशन का वितरण किया गया है। 

मुश्किल वक्त में मिली उम्मीद की किरण  
बांदा। शहर में कोतवाली के सामने स्थित वाल्मिकी बस्ती की रहने वाली सुशीला का कहना है कि प्रशासन या किसी सामाजिक संगठन की अब तक उन पर नजर नहीं पड़ी थी। उसके तीन मासूम बच्चे हैं। पति बीमार रहता है। वह मजदूरी करके अपने बच्चों का पेट पालती है। लाक डाउन के बाद उसके आगे खाने का संकट पैदा हो गया था। मोहल्ले वाले ही कभी-कभार अपने घर से खाना दे जाते थे। ऐसे में वनांगना संस्था से मिली राहत किट मुश्किल वक्त में उम्मीद की किरण लेकर आई है। 

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