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शांति और सद्भाव बनाए रखें.....

देवेश प्रताप सिंह राठौर 
(वरिष्ठ पत्रकार)

 आज हमारे  पास दुनिया का पूरा वैभव और सुख-साधन उपलब्ध है परंतु शांति नहीं है तो हम भी आम आदमी की तरह ही हैं। संसार में मनुष्यों द्वारा जितने भी कार्य अथवा उद्यम किए जा रहे हैं सबका एक ही उद्देश्य है 'शांति'। सबसे पहले तो हमें ये जान लेना चाहिए कि शांति क्या है? शांति का केवल अर्थ यह नहीं कि केवल मुख से चुप रहें अपितु मन का चुप रहना ही सच्ची सुख-शांति का आधार है। कहते हैं कि जहाँ शांति है वहाँ सुख है। अर्थात सुख का शांति से गहरा नाता है। लड़ाई, दुख और लालच को भंग करने के लिए शांति सशक्त औजार है। कई लोग कहते हैं कि बिना इसके शांति नहीं हो सकती। इसके साथ ही भौतिक सुख-साधनों तथा अन्य संसाधनों से शांति होगी यह कहना भी गलत है। यदि इससे ही शांति हो जाती तो हम मंदिर आदि के चक्कर नहीं लगाते। धन-दौलत और संपदा से संसाधन खरीदे जा सकते हैं परंतु शांति नहीं। हम यही सोचते रह जाते हैं कि यह कर लूँगा तो शांति मिल जाएगी। आवश्यकताओं को पूरा करते-करते पूरा समय निकल जाता है और न तो शांति मिलती है और न ही खुशी। खुशहाल पारिवारिक जीवन के लिए जरूरी है कि पहले शांति रहे। जहाँ शांति है वहाँ विकास है। जहाँ विकास है वहाँ सुख है। इसलिए अमूल्य शांति के लिए सबसे पहले हमें अपने आप को देखना होगा। अपने बारे में जानना होगा। मैं कौन हूं, कहाँ से आया हूं और हमारे अंदर कौन-कौन सी शक्तियाँ हैं जो हम अपने अंदर ही प्राप्त कर सकते हैं। शांति का सागर परमात्मा है। हम आत्माएँ परमात्मा की संतान हैं। जब हमारे अंदर शांति आएगी तो हमारा विकास होगा।
जब विकास होगा तो वहाँ सुख का साम्राज्य होगा। यह प्रक्रिया बिल्कुल सरल और सहज है जिसके जरिए हम यह जान और पहचान सकते हैं। वर्तमान समय अशांति और दुख के भयानक दौर से गुजर रहा है। ऐसे में जरूरत है कि हम अपने धर्म और शाश्वत सत्य को स्वीकारते हुए शांति के सागर परमात्मा से अपने तार जोड़ें। ताकि हमारे भीतर शांति का खजाना मिले। इससे हमारे अंदर शांति तो आएगी ही साथ ही हम दूसरों को भी शांति प्रदान कर सकेंगे। भारत अपना विशाल देश यहां पर सभी लोग सद्भाव भाईचारा के साथ रहते हैं विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत देश आज दुनिया के लिए एक मिशाल बना है जहां पर 130 करोड़ की आबादी हो और विकसित देशों की श्रेणी में आने वाला देश हमारा भारतवर्ष आज कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहा है परंतु भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री जी श्रीनरेंद्र मोदी जी की कुशल नेतृत्व इस संकट को दूर करेगा विश्व में भारत के प्रधानमंत्री का महान शख्सियत वाले देश भी अदब से नाम लेते हैं यह सत्य है कि भारत आजादी के बाद उतना विकसित नहीं हो पाया पूर्व सरकारों ने विकास की गति को तेजी से नहीं किया गया जहां तक मेडिकल लाइन की बात है आज भी इतनी अधिक सुविधाएं जिले जिले में व्यवस्थित नहीं है जिसका कारण विकास की गत को पूर्व सरकारों ने ध्यान नहीं दिया तथा घोटाले भ्रष्टाचारी और अन्य तरीके से भारत को खोखला करने में लगे रहे आज भारत काफी मजबूत स्थिति में है और हमें हर धर्म जाति के लोगों को आज इसको रोना वायरस के संकट से दूर करने के लिए हमें प्रधानमंत्री जी के निर्देशों का पालन करना चाहिए तथा राज्य सरकारें भी अपने राज्यों में इसका  लॉकडाउन का पूर्ण पालन कराएं परंतु कुछ अराजक तत्व तबलीगी जमातयो ने जिस तरह शांति सद्भाव को नष्ट करने का काम किया है इन लोगों को सरकार कतई माफ ना करें इन्हें सजा मिलनी चाहिए क्योंकि आज उन्होंने जो कार्य देश की स्थिति को देखते हुए जो कोरोनावायरस से संबंधित अपराध किया है इसके लिए उन्हें अवश्य दंडित किया जाना चाहिए। क्योंकि सच्चा भारतीय इस तरह की हरकत नहीं कर सकता है जिस तरह के अपराध तबलीगी जमातइयों ने किया हैविश्व शांति सभी देशों और/या लोगों के बीच और उनके भीतर स्वतंत्रता, शां गवति और खुशी का एक आदर्श है। विश्व शांति पूरी पृथ्वी में अहिंसा स्थापित करने का एक माध्यम है, जिसके तहत देश या तो स्वेच्छा से या शासन की एक प्रणाली के जरिये इच्छा से सहयोग करते हैं, ताकि युद्ध को रोका जा सके। हालांकि कभी-कभी इस शब्द का प्रयोग विश्व शांति के लिए सभी व्यक्तियों के बीच सभी तरह की दुश्मनी समाप्त होनी चाहिए समाप्त होनी चाहिए। यह वायरस कोई पहला वायरस नहीं है इसके पहले भी बहुत से वायरस आते थे जिनको हम मलेरिया डायरिया चिकनगुनिया बहुत से वायरस आते थे परंतु जो एक कोरोनावायरस चीन द्वारा आया इसने पूरे विश्व को हिला कर रख दिया है। इस मौके पर हर जाति धर्म को वह वेमनुष्यता भूलकर इस संकट से निकलने की हर संभव मदद सरकार की करनी चाहिए। किससे करोना वायरस की माहवारी से हम सब देशवासी इस संकट की घड़ी से निपट सके और भारत एक मजबूत राष्ट्र के रूप में विश्व में अपनी एक नई छवि प्रस्तुत कर भारत का नाम ऊंचा हो इस तरह सब लोग मिलकर आज इस संकट की घड़ी में पूर्ण शांति सद्भाव का परिचय प्रदान करें।

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