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आज भी मदद की आस में कई पछइयां परिवार

लाक डाउन के चलते अभी तक नहीं मिल सकी है इनको कोई मदद 
फांकाकसी की नौबत से जूझ रहे हैं, मांगकर भरते हैं बच्चों का पेट 

कमासिन, के0 एस0 दुबे । कोरोना महामारी के चलते कोई गरीब परिवार के लोग भूख से न मरे इसके लिए सरकार ने गरीबों के लिए राशन सामग्री की व्यवस्था प्रयास में जुटी है। लेकिन लाक डाउन के एक महीने बाद भी कस्बे में पड़े आधा दर्जन से ज्यादा पछाइयां लोहगढ़िया वंशज के परिवारों को शासन स्तर से किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिली। उनके परिवार भुखमरी की कगार पर हैं। वह गांव गांव जाकर राशन सामग्री मांग कर अपने बच्चों का पेट भरने को मजबूर हैं। इन परिवारों के पास भारतीय नागरिक होने का प्रमाण पत्र भी नहीं है।
खुले आसमान में अपने परिवार के साथ जीवन यापन करने वाले पछाहियां लोहगड़िया परिवारों के पास न तो छत है न ही जमीन। ये परिवार सड़क किनारे डेरा डालकर खुले आसमान पर रहते हैं। कस्बे में पछहियां लोहगढिया वंशज के लगभग 7 परिवारों के बीच 40 लोग हैं। जो कि लोहे के हस्त निर्मित सामानों की बिक्री कर अपना जीवन यापन करते हैं। इधर कोरोना महामारी के वजह से एक महीने से चल रहे लाक डाउन में इन परिवारों की हालत खराब हो गई हैं इन परिवारों को खाने की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इनके कुनबे के बाबूलाल ने
मदद की आस में पछइयां परिवार के सदस्य
बताया कि सातो परिवार 25 वर्षों से कस्बे में रह रहे हैं। इनमें फूल्ले, कटारी, उमेश, मटरू, अजय, विमला अपने परिवारों के मुखिया है बताया कि हम लोगों का नाम कमासिन वोटर लिस्ट में है लेकिन हमें शासन की योजनाओं का कोई लाभ नहीं मिल रहा। न ही आधार कार्ड बना है। फुल्ले ने बताया कि लाक डाउन के दौरान  के कुछ समाजसेवी पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष कमल द्विवेद्वी 1 किलो दाल 2 किलो चावल और 5 किलो आटा एक बार दे गए थे। दूसरी बार थानाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह ने 2 किलो आलू, 1 किलो नमक, 1 किलो दाल दिए है। परिवार के 40 लोगों के बीच इतना राशन बहुत कम है। उन्हें शासन स्तर से कोई भी सहायता नहीं मिली। परिवारों की हालत यह है कि घर के मुखिया गांव गांव जाकर मांग कर लाते हैं तब शाम को रोटी की जुगत हो पाती है। सारा कामकाज ठप है जिसकी वजह से सभी परिवार के लोग बेरोजगार हैं। कटारी ने बताया कि परिवार में भुखमरी जैसे हालात हो गए हैं बच्चों की तबीयत खराब होने पर इलाज के लिए पैसा नहीं है। यहां पेट पालने के लाले पड़े हैं उन्होंने कहा कि सरकार को हम गरीबों के लिए भी राशन की व्यवस्था करना चाहिए। मटरू ने कहा कि लाक डाउन के एक महीने बीत जाने के बाद भी कोई भी अधिकारी हम लोगों के पास नहीं आये न ही हमारे परिवार के लोगों से किसी ने खाने पीने के बारे में समस्या जानने की कोशिश की। समस्याओं से जूझ रहे परिवार के लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि भूख गरीबी से जूझ रहे हमारे परिवारों को शासन की योजना के माध्यम से खाद्यान्न की व्यवस्था कराई जाए ताकि हम गरीबों के परिवार भी सुरक्षित रह पाये।

1 comment:

  1. हम सबको एक साथ मिलकर ऐसे लोगों की मदद करनी
    चाहिऐ

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