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घर से बाहर नहीं जाएंगे, कोरोना को हराएंगे

प्रधानमंत्री के आवाहन पर मजबूरन ही घर से बाहर निकल रहे लोग 
कोरोना से होने वाली मौतों को लेकर लोग जाहिर कर रहे हैं अफसोस 
कोरोना को हराने के लिए हर मुसीबत से जूझने को तैयार हैं बाशिंदे 

(लाक डाउन का 24वां दिन)

बांदा, के0 एस0 दुबे । 21 दिन का लाक डाउन जिस तरह से लोगों ने काटा, वह बयां करना मुमकिन नहीं है। लेकिन लाक डाउन पार्ट-2 जब शुरू हुआ तो अब कोरोना से होने वाली मौतों पर अफसोस जताते हुए बाशिंदे यह कह रहे हैं कि वह लाक डाउन कर हर हाल में पालन करेंगे। मुसीबत के इस दौर में लाक डाउन का पालन करना देश सेवा से कम नहीं है। क्योंकि कोरोना वायरस को हराने के लिए यह जरूरी है कि लाक डाउन का हर हाल में पालन किया जाए। जनपद के बाशिंदों का कहना है कि वह घर में रहेंगे और कोरोना को हराने का काम करेंगे। 
घर से बाहर नहीं जाएंगे, कोरोना को हराएंगे 
पहली बार जब 25 मार्च को 21 दिन के लिए लाक डाउन घोषित किया गया तो लोग सहम से गए थे कि आखिर लाक डाउन का यह समय कैसे गुजरेगा। लेकिन जब हौसला होता है तो हर नामुमकिन समय मुमकिन हो जाता है। लोगों ने बड़ी ही शिद्दत के साथ लाक डाउन का समय गुजारा। बीच में जब शोर मचा कि लाक डाउन और बढ़ाया जाएगा तो प्रदेश सरकार के
लाक डाउन में आवागमन रोकने के लिए बैरिकेडिंग घसीटकर ले जाता पुलिस कर्मी

मुख्यमंत्री की ओर से यह घोषणा की गई थी कि लाक डाउन आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, इससे लोगों ने राहत की सांस ली थी। लेकिन 13 अप्रैल को जब लोगों ने लाक डाउन की समय समय एक दिन बचने के बाद खुशी जाहिर की तो उनकी खुशी एक बार तब काफूर हो गई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल को सुबह 10 बजे टीवी पर एक बार देश के नाम फिर से
शहर के मुख्य मार्ग में लाक डाउन के दौरान गुरुवार को पसरा सन्नाटा
संबोधन किया। इस संबोधन में 19 दिन के लिए लाक डाउन और बढ़ा दिया गया। लोग मन मसोस कर रह गए, लेकिन जब कोरोना वायरस के कहर की कहानी जनता के सामने आई तो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले का तहे दिल से स्वागत किया। पूरे जोश के साथ बोले कि हम लाक डाउन के ये 19 दिन भी गुजार लेंगे, कुछ परेशानियां होंगी तो फिर देखा जाएगा। क्योंकि लाक डाउन का पालन करना वर्तमान समय में देश सेवा से कम नहीं हैं। कोरोना को हराने के लिए लोगों का घरों में रहकर लाक डाउन का पालन करना बहुत जरूरी है। 

गरीबों की मदद को उठे हजारों हाथ 
बांदा। अपने देश के लोग किसी के अच्छे वक्त में भले ही न साथ दें लेकिन संकट के समय में हजारों हाथ संकट ग्रस्त व्यक्ति की मदद के लिए उठ जाते हैं। वर्तमान समय में जब कोरोना का कहर पूरे देश में है और लाक डाउन जारी है, ऐसे में रोज कमाने खाने वाले गरीबों की मदद के लिए न सिर्फ समाजसेवी बल्कि, राजनीतिक दलों के लोग, जनप्रतिनिधि सांसद,
घर से बाहर नहीं निकलेंगे: छत पर खड़े मासूम बच्चे और अन्य लोग
विधायक सभी गरीबों को भोजन कराने पर डटे हुए हैं। कोई राशन बांट रहा है तो कोई लंच पैकेट, कोई कपड़े आदि भी उपलब्ध करा रहा है। यही सब देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि संकट के समय में लोग पूरी ताकत के साथ महामारी को हराने में डटे हुए हैं। 

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