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पहिली बार ऊ लड़की का छुट्टी मिली.. जो कहत रही यात्रीगण कृपया ध्यान दें

दोस्तों लागत है कि यो साल केवल एक बनियान अउर हाफ पैंट मा ही निकरि जाई!! सब पंचे घरे बईठ हैं.. गली मुहल्लन मा सन्नाटा पसरा आय.. अइसेहे एक बंदर एक कुत्ता से पूछिस ‘यार एतना सन्नाटा काहे है भाई?’.. कुत्ता जवाब दिहिस ‘अरे चाइना वाला चमगादड़ सबका उल्टा लटकाय दिहिस’.. अब ई लॉकडाउन मा सब पंचे घरे बईठे टीवी देखि देखि के ज्ञानी बनि रहें..

आमजा भारत सवांददाता:- तो जो ‘महा-ज्ञानी’ न्यूज देखि के 10 मिनट मा हमका फॉरवर्ड करि देत हैं.. उन सबै से हम कहे चाहित है कि हमहूं घर मा खाली बईठे न्यूज ही देखि रहे हन.. कृपा करि के आप जादा रिपोर्टर बने की कोसिस ना करैं.. वइसे भी हमाय बचपन का दौर वापस आय गवा है.. अरे दूरदर्सन पे सुबह साम रामायण चलि रही.. अउर कोऊ कोऊ के हिंया दूरदर्शन पे रामायण देखत भये उनके बुजुर्ग आगे की कहानी अईस सुनावत हैं कि जइसे उई खुदै वानर सेना मा रहैं..

वइसे एक बात तो सिद्ध हुई गे कि रामायण काल सेहे ‘वानर’ सिरिफ पुरुष होत हैं.. महिलाएं नाहीं.. अच्छा हमरे मोहल्ले किदवई नगर मा काफी लोगन की हालत लक्ष्मण के जईस ‘अर्ध मूर्छित अवस्था’ जईस हुई गई है.. अब कोऊ हनुमानजी जईस मित्र पान मसाला..चुनही.. मदिरा स्वरुप जड़ी बूटी ढूंढ के लाय दे तो उनका होस आय.. हमका तो लगत है कि अइसेहे चलत रहा तो लॉकडाउन के बाद जब लड़िका बड़ी बड़ी दाढी के साथ घर से निकरि हैं तो उनकी गली के कुत्ते कहि हैं..

‘भईया रामायण देखत देखत वनवास का निकरि गये रहेव का?? वइसे लॉकडाउन अउर रामायण के ई दौर मा एक नई चौपाई मारकिट मा आयी है.. जो बहुत फायदेकारक अउर स्वास्थ्य वर्धक आय.. बाहर निकल भ्रमण जिन कीन्हां। खाकी-गण दारुन दुख दीन्हां॥ लंब डंड से होत ठुकाई।.. करहु नियंत्रण मन पर भाई॥ लॉक डाउन रहहु गृह माहीं।.. भ्रमण फिज़ूल करहु तुम नाहीं बोलो सियावर रामचन्द्र की जय॥ वइसे हमरे कानपूर वाले बहुतै परम चिरैंध आंय..

ई लॉकडाउन मा बाहर निकले से बाज नाही आय रहैं.. अरे ई तो फिर भी कोरोना आय.. अगर यमराज खुद आ जाएं तभों ई लोगे उनका देखे बाहर निकरि हैं कि.. वइसे ई लॉकडाउन मा एक लड़की बहुत खुस आय.. काहे से पहिली बार ऊ लड़की का छुट्टी मिली आय.. अरे जो हमेसा रेलवे इस्टेसन पे चिल्लावत रही.. यात्रीगण कृपया ध्यान दें.. अउर ई लॉकडाउन मा हमका एक बात समझ मा आई कि पूरी दुनियां मा आलू से जादा वफादार कौनो सब्ज़ी नाही आय.. बाकी सब सब्जी दुई तीन दिना मा चल बसत हैं..

खाली ई आलू आय जो लम्बा साथ देत है.. अब ई लॉकडाउन मा किराने केर दुकाने तो खुली भयी हैं.. तो कल हम आपन मोहल्ले के परचून वाले के हिंया सौदा ले गए तो उई दुकानदार बहुत खुस रहा.. हम कहा का भा बे.. तो कहे लाग अरे राजू भईया आज हमार बरसों बरस केर बदला पूरा हुई गा.. हम कहा कइसे मे.. तो उई कहिस अरे आज हमरी दूकान पे SBI बैंक का मनीजर किराना लेन आवा रहै.. हमहूं ओका कहि दिया.. जाओ बाद मा आयेव.. अभीन हमरा लंच टाइम है..

कसम से छाती ठंडी हुई गे.. अच्छा दोस्तों समय का फेर देखौ सब स्कूल वाले जौने मोबाईल का बेइज्जज करि के स्कूल से बाहर निकारिन रहैं.. कि Mobiles are not allowed in the School.. आज वहै मोबाइल स्कूल चलाय रहा है.. ऑनलाइन स्टडी चलि रही.. अच्छा ई ऑनलाइन स्टडी मा भी लभेड़ी छात्र आंय.. अइसेहे ऑनलाइन क्लास ग्रुप मा हमरे नौबस्ता वाले दोस्त संतोस का लौंडा पिंटू आपन टीचर से कहिस सर एक प्रश्न है?? टीचर कहिन हां पूछौ.. पिंटू कहिन सर रिया ऑनलाइन है का??

उनके टीचर कहिन हां है.. तो पिंटू कहिन सर ओका कहौ कि हमका फेसबुक पे अनब्लॉक करि दे प्लीज .. सब पंचे ऑनलाइन बईठ हैं.. अउर हमका पूरा यकीन आय कि जब लॉकडाउन खत्म हुई जाई तो सोसल नेटवर्क पे नया नाटक सुरू हुई जाई.. सब स्टेटस डलिहैं कि Missing My Quarantine Days! लास्ट मा एक्कै बात कहे चाहित है.. कि हमरी बात ध्यान से सुना करौ.. काहे से हमरे घर में हमरी कोई सुनत नहीं है ..।

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