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भाईचारे के बीच ईद की खुशियां मनाने का पैगाम देता रमजान: कारी फरीद

जकात से यतीम, बेसहारा, गरीब व बेवाओं की होती है ईद 
मालदार को कमाई का चालीसवां हिस्सा जकात निकालना फर्ज
 
फतेहपुर, शमशाद खान । रमजान का महीना अमीर व गरीब सभी को एक साथ मिलकर भाईचारे के बीच ईद की खुशियाँ मनाने का पैगाम देता है। इस पाक माह में मुस्लिम समाज के लोग जकात, खैरात, सदका फितर जैसी रकमो से अपने गरीब व नादार भाईयों की सहायता कर उनको बराबर जीने का हक देते हैं। 
यह बात काजी शहर फरीद उद्दीन कादरी ने कही। उन्होने कहा कि रोजा व नमाज के साथ-साथ मालदार लोगों को चाहिए कि वह अपने माल की पूरी जकात जरूर निकालें क्योंकि आपके द्वारा निकाली गई जकात से यतीम, बेसहारा गरीब व बेवाओं की भी ईद होती है। काजी शहर श्री कादरी ने कहा कि यदि रोजेदार अपने माल की जकात नहीं निकालता तो मैदाने महशर मे
शहरकाजी कारी फरीद उद्दीन।
उसका रोजा उसके मुँह पर मार दिया जाएगा। लिहाजा अगर आप मालिके नेसाब (मालदार) हैं तो जकात की अदायगी में देरी न करें और अपने महबूब कमाई का चालीसवां हिस्सा यानी ढाई फीसदी जकात निकालना फर्ज है। उन्होंने कहा कि अल्लाह तआला ने जकात का हुक्म देकर अपने बंदांे की खिदमत व मदद करने का मौका अता किया है। हम सभी को इस पर अमल करना चाहिए। लिहाजा मुस्लिम समाज के लोगों को चाहिए कि माहे रमजानुल मुबारक में ज्यादा से ज्यादा गरीब, यतीम और मिस्कीनों की मदद करें लेकिन सबसे पहले अपने रिश्तेदारों में मजबूर व लाचार मुसतहेक तालाश करें और मदद करके दोगुने सवाब के हकदार बनें। फिर गरीब, यतीम, मिसकीन में अपनी जकात दें। काजी शहर कारी फरीद उद्दीन कादरी ने कहा कि रमजान के दूसरे अशरे मे यदि गरीब का हक दे दिया जाए तो वह भी अपनी ईद की खुशियों की तैयारी कर ले। कहीं ऐसा न हो कि लालच के मारे जकात अदा न करे और गुनहगार हो और जकात इस तरह से दे कि एक हाथ से दे तो दूसरे हाथ को पता भी न चल सके। श्री कादरी ने मुस्लिम समाज के रोजेदारों से अपील किया कि अफ्तार के वक्त वह अल्लाह तआला से मुल्क की सलामती व कोरोना वायरस जैसी खतरनाक बीमारी के खात्मे की दुआ करें क्यांेकि अफ्तार के वक्त मांगी गई दुआ अल्लाह तआला कबूल फरमाता है।

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