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अनाज के सुरक्षित भंडारण से किसान बचा सकते हैं अनाज की हानि - डॉ फूल कुमारी

हमीरपुर, महेश अवस्थी । वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र, कुरारा, हमीरपुर ने कहा कि किसान भाई उत्तम बीज,  ऊवरक, एवं फसल सुरक्षा के उपायों के साथ नयी तकनीक अपना कर अधिकतम उत्पादन ले रहे हैं ।  परन्तु  इस कड़ी मेहनत के बाद भण्डारण में कीट - व्याधियों द्वारा भारी नुकसान कर रहे है ।फसलों की कटाई के बाद सबसे महत्वपूर्ण काम अनाज भंडारण का होता है। अनाज भण्डारण में महिलाएं  महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।  भण्डारण की सही जानकारी न होने से 10 से 15 प्रतिशत तक अनाज नमी, दीमक, घुन, बैक्टीरिया द्वारा नष्ट हो जाता है। किसान भाई सुरक्षित भण्डारण तकनीक अपनाकर अनाज को चूहों, कीटों, घुन, नमी  से बचा सकते हैं। अनाज को रखने के लिए गोदाम की सफाई कर दीमक और पुराने अवशेष को जलाकर नष्ट कर दे। दीवारों, फर्श एवं जमीन आदि में यदि दरार हो तो उन्हे सीमेंट, ईट से बंद करे दें। टूटी दीवारों की मरम्मत करा दें। अनाजों को अच्छी तरह से साफ-सुथरा कर धूप में सुखा लेना चाहिए, जिससे कि दानों में 10 प्रतिशत से अधिक नमी न रहने पाए। अनाज में ज्यादा नमी रहने से फफूंद एवं कीटों का आक्रमण अधिक होता है। अनाज को सुखाने के बाद दांत से तोड़ने पर कट की आवाज करें तो समझना चाहिए कि अनाज भण्डारण के लायक हो गया है। इसके बाद अनाज छाया में रखने के बाद ठंडा हो जाने के बाद ही भण्डार में रखना चाहिए।भंडारण के लिए लकड़ी और तख्ते का मंच  तैयार  करें।अनाज से भरे बोरे को भण्डार गृह में रखने के लिए फर्श से 20 से 25 सेमी की ऊंचाई पर बांस या लकड़ी के तख्ते का मंच तैयार करना चाहिए, जो दीवार से कम-से-कम 75 सेमी की दूरी पर हो। बोरियों के छल्लियों के बीच भी 75 सेमी खाली स्थान रखना है। भण्डार-गृह हवादार हो एवं जरूरत पड़ने पर वायुरूद्ध भी किया जा सके।भण्डार से पूर्व पक्का भण्डार गृह एवं धातु की कोठियों को साफ-सुथरा कर लेना चाहिए एवं कीटमुक्त  करना चाहिए। गोदाम में पक्षियों एवं चूहों के आने-जाने के रास्ते को बंद कर देना चाहिए।
 
अनाजों व दालों का भंडारण कुछ पारंपरिक अन्न भंडारण के तरीके जैसे आनाजों व दालों के कड़वा तेल लगाना, नीम, लहसुन  बिछाना, सूखे हुए लहसुन के डंठल रखना है।भण्डारण बोरी को खौलती नीम की पत्ती वाले पानी में शोधित कर अच्छी तरह सुखा लेना चाहिए।अनाज भंडारण में नीम की पत्ती का प्रयोग करते समय नीम पत्ती सूखी होनी चाहिए। इसके लिए नीम पत्ती को भण्डारण से 15 दिन पहले किसी छायादार स्थान पर कागज पर रख कर सुखा ले ,उसके बाद अनाज की बोरी में रखे।  बोरियों में अनाज भर कर रखने के पहले इन बोरियों को 20-25 मिनट तक खौलते पानी में डाल देना चाहिए। इसके बाद धूप में अच्छी तरह सूखा देना चाहिए अथवा छिड़काव के लिए बने मैलाथियान 50 प्रतिशत के घोल में बोरियों को डुबाकर फिर बाहर निकालकर सुखा लेना चाहिए। ठीक से सूख जाने के बाद ही उसमें अनाज भरना चाहिए। किसान भाई  इन सुझावो को अपना कर भण्डारण के दौरान होने वाले क्षति से बच सकते हैं। किसान भाई भण्डारण हेतु विषैले कीटनाशक दवाओं का प्रयोग न करें क्यों कि स्वास्थ्य पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। बाजार में उपलब्ध पारद टिकरी द्वारा भी अनाज को सुरक्षित रख सकते हैं। यह आयुर्वेदिक है ,विशेषज्ञों के अनुसार स्वास्थ्य पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव भी नहीं पड़ता है।

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