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खाना बदोसों के चूल्हे पड़ गए ठंडे

लाक डाउन से मुसीबत उठा रहे हैं खानाबदोस 

नरैनी, कृपाशंकर दुबे । लाक डाउन के चलते कारोबार बंद होने के कारण खानाबदोसों के चूल्हे नहीं जल पा रहे हैं। लाक डाउन ने उन्हें 300 किमी दूर अपने गांव घर लौटने से भी रोक दिया है। इसके चलते खानाबदोसों का पेट भर पाना मुश्किल हो गया है।
तहसील क्षेत्र के करतल गांव स्थित रावण पहाड़ी के नीचे झुग्गी बनाकर घुमंतू परिवार के 22 लोग पड़े हैं। इनमे ज्यादातर महिलाएं और अबोध बच्चे हैं। शादी-ब्याह या अन्य भोज कार्यक्रमों
करतल गांव में रावण पहाड़ी के समीप बैठे खाना बदोसा
में थाली धुलने तथा दोना पत्तल फेंकने का कार्य करते थे, जो लाक डाउन के बाद बंद हो गया है। बुजुर्ग घुमन्तु राजेन्द्र (65) पुत्र मिहीलाल ने बताया कि वह लोग अपने गांव गांधी ग्राम बरौली खलीला बाद (लखनऊ) से फरवरी में यहां आये थे। बहुत लोगों से एडवांस लिये थे लेकिन सभी कार्यक्रम बंद होने के कारण सब वापस करना पड़ा। गांव में कोटेदार से फरियाद करने के बाद कुछ गेहूं और चावल मिला था, लेकिन हमारे पास नमक खरीदने के लिये भी रुपये नहीं रहे। हम लोग तो सूखा खाकर किसी तरह काम चला लेते थे परन्तु बच्चे बिना दाल, सब्जी आदि के खाना नही खाते। 15 दिन पहले एक व्यक्ति आये थे जो स्वयं को लेखपाल बता रहे थे, लेकिन उसके बाद से अब तक कोई मदद नही मिली। अगर थोड़े दिन और ऐसा ही रहा तो हमारे परिवार के लोग भूंख से मरने लगेंगे।

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