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लाक डाउन का दसवां दिन: सब कुछ चल रहा राम भरोसे

21 दिवसीय देशव्यापी लाक डाउन का दसवां दिन 
सुबह घर से निकल पड़ते, 10 बजे फिर घरों में कैद 
चौराहों पर तैनात पुलिस भी कर रही रस्म अदायगी 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । देशव्यापी लाक डाउन का शुक्रवार को दसवां दिन था। सख्ती की बात करें तो पुलिस चैराहों पर तैनात रहकर महज रस्म अदायगी कर रही हैं अलबत्ता छूट की खुली लूट करने में भी पब्लिक कोई संकोच नहीं कर रही है। यह बात दीगर है कि जनता अपनी ही जान को सांसत में डालने का प्रयास कर रही है, लेकिन इससे फिलहाल उनका कोई सरोकार नजर नहीं आ रहा है। सुबह के वक्त खरीददारी के लिए मिलने वाली छूट का अनुचित लाभ लोग उठा रहे हैं। पुलिस भी आखिर कहां तक हाथ-पांव मारे, वह भी चुपचाप बैठी हुई है। 
शुक्रवार को लाक डाउन के दौरान सड़क पर पसरा सन्नाटा और बाजार में बंद दुकानें
कोरोना वायरस के संक्रमण की साइकिल को तोड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बहुत ही ठोस कदम उठाते हुए 21 दिन का लाक डाउन घोषित किया गया है। लाक डाउन
सोशल डिस्टेंसिंग कर वितरित किया गया राशन
का मतलब यह है कि लोग अपने घरों की ड्योढ़ी से बाहर नहीं निकलें। लेकिन ऐसा बहुत कम हो पा रहा है। चैराहों पर पुलिस तो तैनात कर दी गई है लेकिन पुलिस भी आखिर कहां तक लोगों को समझाए। एक को समझाती है तो चार पैदल चलते नजर आते हैं। पिछले कई दिनों में पुलिस ने कई बार लोगों को डंडा ठोंककर भगाया, इसका असर भी कुछ घंटे ही नजर आ
गरीबों को लंच पैकेट वितरित करते इंडियन बुलियन ज्वैलर्स पदाधिकारी
रहा है। शुक्रवार को लाक डाउन के दसवें दिन हालांकि जागरूक लोग अपने ही घरों में कैद रहते हैं। बहुत इमरजेंसी पड़ने पर ही वह बाहर निकलते हैं। सुबह के वक्त मिलने वाली छूट के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का बिल्कुल पालन नहीं हो पा रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न होने के कारण लाक डाउन का कोई मतलब समझ में नहीं आ रहा है। हालांकि पुलिस
विहिप पदाधिकारी राशन वितरित करते हुए
और जिला प्रशासन के अधिकारियों की ओर से लोगों को लाक डाउन का पालन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। लाक डाउन के मायने भी बताए जा रहे हैं, लेकिन पब्लिक है कि मानती नहीं। 

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