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कोरोना से जंग:- आम लोगों के साथ ही इनकी दैनिक दिनचर्या भी पूरी तरह से गई बदल

कोरोना महामारी की रोकथाम में जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी अग्रिम मोर्चे पर तैनात हैं। सुबह से लेकर देर रात तक सभी इस कवायद में जुटे रहते हैं आखिर कैसे इस संकट से आम लोगों को बचाया जा सके। आम लोगों के साथ ही इनकी ही दैनिक दिनचर्या पूरी तरह से बदल गई है।
बस एक ही उद्देश्य, सुरक्षित रहें लोग : एडीजी
आमजा भारत कार्यालय संवाददाता:- अपर पुलिस महानिदेशक कानपुर जोन जय नरायन सिंह बताते हैं कि कोरोना संकटकाल से पहले जनसमस्याओं की सुनवाई मेरी प्राथमिकता थी, लेकिन अब पूरा दिन महामारी के संक्रमण को रोकने में की जाने वाली तैयारियों में बीतता है। सुबह सभी जिलों के अधिकारियों से बातचीत के बाद हर रोज निरीक्षण के लिए बाहर निकल जाता हूं। बाहर से घर आने पर बरामदे में कपड़े उतार कर पहले नहाने जाता हूं। इसके बाद ही परिवार के लोगों से मिलता हूं। वह बताते हैं कि चूंकि उनके अधिकार क्षेत्र के जनपदों की सीमा मध्यप्रदेश से लगी हुई है, इसलिए बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना अभी भी बना हुआ है। ऐसे में बाहर से आए लोगों के रहने खाने के इंतजामों की समीक्षा में दिन बीत रहा है। लोग मुझे देखकर भी जागरूक हों इसलिए मास्क लगाने, समय-समय पर हाथ धोने के साथ ही शारीरिक दूरी के नियमों का पालन सार्वजनिक रूप से भी करता हूं। पहले ही अपेक्षा दिनचर्या पूरी तरह से बदल गई है, जिम्मेदारी भी अब पहले से अधिक बड़ी है।

दिनचर्या बदली लेकिन मुस्तैद हैं हम : मंडलायुक्त
मंडलायुक्त डॉ. सुधीर एम बोबडे कहते हैं कि कोरोना से जंग ने दिनचर्या को पूरी तरह बदल दिया है। सुबह दूसरों की सुरक्षा की चिंता के साथ शुरू होती है और रात इसी चिंता के साथ खत्म। दिनचर्या जरूर बदली है लेकिन हम मुस्तैद हैं। वह बताते हैं कि देर रात तक काम के बाद सुबह नींद भी मोबाइल की घंटी से खुलती है। आठ बजे से जिलाधिकारियों से रिपोर्ट लेना शुरू करते हैं और सीएम कार्यालय को इनपुट देते हैं। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य मीटिंग लेते हैं। उनसे दिशा निर्देश लेकर संक्रमित क्षेत्रों का निरीक्षण करने निकलते हैं। घर वापसी पर प्रोटोकॉल का पालन करते हैं। खुद को पूरी तरह सैनिटाइज करने के बाद कपड़े अलग रखते हैं। पत्नी मेरी सुरक्षा को लेकर ज्यादा चिंतित और सतर्क रहती हैं। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेद के साथ काढ़ा आदि का नियमित प्रयोग कर रहे हैं। इसके लिए सादा और पौष्टिक खाना खाते हैं। पूना में रह रहे माता-पिता, भाइयों और वाशिंगटन में बेटी से अक्सर बात होती थी लेकिन अब बात का समय सीमित हो गया है। अमेरिका, जापान में दोस्त हैं, उनसे भी बात का क्रम कम हुआ है।

20 साल बाद एक साथ आया परिवार, फिर भी दूर-दूर : आइजी
आइजी मोहित अग्रवाल कहते हैं कि पारिवारिक जीवन में 20 साल बाद पहला ऐसा मौका है जब मेरा पूरा परिवार एक साथ है लेकिन, मौका ऐसा कि इतने पास होकर भी हम दूर-दूर हैं।

पत्नी नोएडा में नौकरी करती हैं, जबकि दोनों बेटियां बाहर रहकर पढ़ाई करती हैं। कोरोना संकट के समय पूरा परिवार एक साथ उनके साथ ही है, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, वह परिवार से उतने ही दूर जा रहे हैं। वह बताते हैं कि सुबह उठते ही मंडल के सभी छह जनपदों के कप्तानों से बात करके हालात की समीक्षा करता हूं। इसके बाद निरीक्षण के लिए बाहर निकलता हूं, ताकि सड़कों पर तैनात पुलिसकर्मियों को यह अहसास रहे कि अफसर घरों में नहीं बैठे हैं। वापस लौटने पर उन्हें घर के बरामदे में ही रोक दिया जाता है। कपड़े उतार कर सैनिटाइज होते हैं, फिर घर के अंदर जाकर नहाते हैं। परिवार के साथ वक्त कम ही बीत रहा है, सभी दूर दूर ही रहते हैं। कई बार तो बच्चों से पूरा दिन मुलाकात भी नहीं होती।

समय कम हो गया है, काम बढ़ गया है : डीएम
कोरोना योद्धा की अग्रिम पंक्ति में जिलाधिकारी डॉ. ब्रह्मदेव राम तिवारी सबसे आगे हैं। उनकी सुबह छह बजे शुरू होती है और रात ढाई बजे खत्म। इसके बीच में जितने घंटे बचे वह भी कम पड़ जाते हैं। जिलाधिकारी बताते हैं सुबह छह बजे से ही फोन जगा देते हैं। इसके बाद अफसरों को ब्रीफ करते हैं। पूजा का समय भी सीमित हो गया है। सुबह आठ बजे से ही लोगों का आना जाना शुरू हो जाता है। कोशिश करते हैं कि संक्रमित क्षेत्रों में सुबह एक राउंड लग जाए। परिवार लखनऊ में हैं। यहां अभी पिता जी साथ में हैं। वह चिंतित रहते हैं। खाना भी वक्त बे वक्त होता है। बाहर से घर वापस आने पर कपड़े सैनिटाइज करते हैं। कपड़े बदलकर साबुन से हाथ धोने के साथ प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखते हैं। जिलाधिकारी बोले, तीन से चार घंटे डॉक्टरों से संपर्क में जाता है। बच्चों से बात करने का टाइम कट गया है। वीडियो कॉलिंग पर परिवार से बात करते हैं। दोस्तों-रिश्तेदारों से बात सीमित हो गई है। अपनी ओर से बात करने का अवसर ही नहीं मिलता।

क्राइम कंट्रोल से बड़ी हो गई है जिंदगी बचाने की मुहिम : एसएसपी
डीआइजी अनंतदेव कहते हैं कि पुलिस का काम क्राइम कंट्रोल है, लेकिन कोरोना संकट काल में हमारी भूमिका बदल गई है। इन दिनों मुख्य मकसद संक्रमण से लोगों की जान बचाना है। चुनौती पहले से कम है, लेकिन जिम्मेदारी बहुत अधिक बढ़ गई है। वह बताते हैं कि इन दिनों सुबह साढ़े सात बजे उठकर योग और दैनिक कार्यों से निवृत्त होने के बाद अधीनस्थ अफसरों से बात करता हूं। फिर उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट करता हूं। साढ़े नौ बजे घर से निकलकर सबसे पहले हॉट स्पॉट का निरीक्षण करता हूं। दोपहर बाद घर वापस आता हूं तो वर्दी बाहर निकाल देता हूं। सैनिटाइज होकर घर के अंदर जाता हूं और दोबारा नहाता हूं। खाना खाने के बाद कार्यालय में काम करके शाम को फिर निरीक्षण पर निकल जाता हूं। इस दौरान अगर किसी प्रभावित स्थल पर जाना हुआ तो रात को भी नहाना पड़ता है, नहीं तो सैनिटाइजेशन से काम चल जाता है। इस दौरान पत्नी व बच्चों से निरंतर शारीरिक दूरी बनाए रखा है, ताकि परिवार को संक्रमण से बचाया जा सके। 

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