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टूटी आस,छोटे व्यापारी व मध्यमवर्गीय हुए निराश

लॉक डाऊन बढ़ने से बढ़ा व्यापारियों पर आर्थिक, घरेलू प्रेशर।


पूंजी,व्यापार टूटने की आशंका से सहमे छोटी पूंजी के व्यवसाई।

वाराणसी, विक्की मध्यानी। कोरोनावायरस की रोकथाम के लिए सरकार ने इक्कीस  दिनों का लाॅकडाउन किया था । मंगलवार को इसे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने इसे तीन मई तक बढ़ा दिया।  कारण यह है कि कोरोना वायरस अभी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं है। इसलिए सरकार को लॉक डाऊन बढ़ाने के लिए बाध्य होना पड़ा। लॉक डाऊन की अवधि बढ़ते ही  मध्यमवर्गीय लोग और छोटी पूंजी वाले व्यापारियों के माथे पर बल पड़ गया,जो अब तक लॉक डाऊन हटने की उम्मीद किये थे वह निराश हो गयें क्योंकि उनकी आर्थिक घरेलू स्तिथि अब डवांडोल हो चुकी है।उन्हे ड़र है मोहल्लो की बनावटी दुनिया का और तंज मारने वाले उड़न छल्ले का,लोक लज्जा से खाली पेट के लिए चौकी थाने पर लाइन लगा नहीं सकते, खाली हाथ फैला नहीं सकते,मासूमों को वह समझा नहीं सकते वह भी इस लाॅक डाउन से लाचार है।न पैसा है न तो व्यापार। मध्यमवर्गीय व छोटे पूंजी व्यापारियों का हाल :गिलट बाजार के फिश एक्वेरियम चलाने वाले किशन केशरी का कहना है कि 21 दिन तो जैसे तैसे गुजर गई अब लॉकडाऊन कांटीन्यू कर देने से हमारी घरेलू समस्याएं बढ़ गयी हैं और इस बीच हमारी कितनी रंगीन मछलियां मर
गई। हम किससे अपनी समस्या कहें। उदय प्रताप कॉलेज के गेट पर  स्टेशनरी की छोटी सी दुकान चलाने वाले सुनील गुप्ता का कहना है कि हम लोगों का यही पिक सीजन होता है। मगर लॉक डाऊन के चलते दुकान और स्कूल दोनों बन्द चल रहे हैं। ऐसे में घर परिवार का खर्च चला पाना भी बहुत मुश्किल हो रहा है। हम अपनी पीड़ा किससे कहने जायें। छोटी पूंजी वाले तो इस लॉकडाऊन में टूट ही जायेंगे।
महमूरगंज में कॉस्मेटिक सामानों के छोटे व्यापारी पंकज सचदेवा का कहना है कि हम छोटे व्यापारी भी एक दिहाड़ी श्रमिक की तरह हैं। मार्केट खुलती है तो जीविका चलती है,मार्केट बंद तो आजीविका बंद। न कोई मेरे पास खेत है न खलिहान न मैं बीपीएल श्रेणी में आता हूं,न मुझे सरकारी राशन मिलता है।मैं टैक्स देता हूं फिर भी कोई सरकारी सुविधा नहीं मिलती,न कोई चिकित्सकीय सुविधा,न कोई पीडीएफ,न कोई वृद्धावस्था में पेंशन। इतने लंबे दिनों के लाॅकडाउन में  आर्थिक स्थिति और भी दयनीय हो गई है।हम जैसे मध्यमवर्गीय व छोटी पूंजी वालों के लिए आर्थिक पैकेज में कोई प्रावधान नहीं।फिर भी मैं इस आपातकाल में अपने परिवार के साथ देश के साथ हूं। क्योंकि मैं मध्यमवर्गीय व छोटे व्यापारियों की श्रेणी में आता हूँ। सरकार को हम छोटे व्यापारीयों की भी सुध लेनी चाहिए।

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