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अभी चुप्पी है, क्योंकि सामने कोरोना खड़ा है।

पालघर के संत का चेहरा आंखों में बसा है,
 भीड़ ने दी उनको किस बात की सजा है। बेबस और लाचार हैं सब, भीड़ ने कब सुना है ।
अभी चुप्पी है, क्योंकि सामने कोरोना खड़ा है। जमात, मरकज ना जाने कौन सी कथा है, 
मेरी मानो मुल्क ही सबसे बड़ा है खुदा है। मंदिर मस्जिद सब हो गए हैं बंद, क्योंकि करोना खड़ा है।
 तुम जब घर में बैठे हो तुम्हारे लिए कोई खड़ा है, 
डॉक्टर, नर्स ,पुलिस की कर लो बस इज्जत, नहीं बनना हमको खुदा है ।
भीगी है आंखें सोच कर, गए हैं लाखों अभी ना जाने क्या-क्या देखना बचा है।
 संभाल के रखो दुनिया वालों सामने करोना खड़ा है।

नवोदयन डॉ लोकेंद्र सिंह
ऑर्थोपेडिक सर्जन
राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली।

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