Latest News

कोरोना यदि छोड़ दे, मरकज वाली गोद ......

लाकडाउन से वनवास में हुआ कविता का अहसास   

शिकोहाबाद, विकास पालीवाल  ।  कोरोना को चुनौती देने के लिए सारे देश में लाक डाउन जारी है। प्रधानमंत्री  के संदेश को मानते हुए सभी अपने घरों में हैं। जिन्दगी जैसे थम सी गई है। अपनी रचनाओं से समाज को संदेश देने और जागृत करने वाले कवि व रचनाकार भी घर के अन्दर वनवास पर हैं लेकिन वे अपनी रचनाधर्मिता से अपने सामाजिक दायित्वों का पूर्ण निर्वहन
कवि  प्रशांत उपाध्याय ।
कर रहे हैं । शिकोहाबाद के कवि एवं व्यंग्यकार प्रशान्त उपाध्याय, जो कवि सम्मेलन व प्रकाशन जगत के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान रखते हैं, लाक डाउन के समय में कोरोना के खिलाफ व वर्तमान परिवेश में लोगों को जागरूक करते हुए अपनी कुछ रचनाओं के माध्यम से अपने भावों को अभिव्यक्ति दी है। 

कुछ काव्यात्मक पंक्तियां दी है - 

जीवन  फिर  आगे  बढ़े,  मन  में  भरे  प्रमोद । 
कोरोना  यदि  छोड़ दे,  मरकज  वाली गोद ।। 
भारत से मिट  जाय यदि,  तबलीगी  का वंश ।  
घर के अन्दर  ही रहो, जीवन से  यदि प्यार ।।
हिम्मत की  तलबार को,  नहीं रखे  हम म्यान । 
कोरोना  तू   मान   जा,  कर   देंगे   हलकान ।।
भूले   घर,  रिश्ते   सभी,  भूले   सुबहो - शाम । 
सेवा  करते   देश  की,  उनको  करूं  प्रणाम...  ।। 

No comments