Latest News

लॉकडाउन:- घर में रहते हुए छिप कर नहीं कर पा रहे थे बातें, कानाफूसी से खुली जाती है पोल

आमतौर पर त्योहार या छुट्टी में ही घर के सभी सदस्य एकसाथ रहते हैं। इसके बावजूद एक-दूसरे को समझना आसान नहीं होता। लंबे लॉकडाउन में घरों में परिवार के सदस्यों के बीच संवाद बढ़ा तो एक-दूसरे को समझना आसान हो गया। बेटे-बेटियों के लव अफेयर की पोल खुली तो कई जगह झगड़े इतने बढ़े कि मनोवैज्ञानिकों की देहरी तक पहुंच गए।
आमजा भारत कार्यालय संवाददाता:- वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. एलके सिंह के नेतृत्व में बने 24 मनोवैज्ञानिकों के सामने नए-नए मामले आ रहे हैं। यह सेल कोरोना से तनाव या अवसाद की समस्याओं को हल करने के लिए बनाई गई थी, लेकिन धीरे-धीरे दिलचस्प मामले भी सामने आने लगे हैं। पूर्व मंडलीय मनोवैज्ञानिक डॉ. सिंह का कहना है कि जितने भी प्रकरण उनके या उनके सदस्यों के पास आए हैं, उसमें 10 फीसदी प्रेम-प्रसंग यानी अफेयर से जुड़े हुए हैं।

हम शादी नहीं करने देंगे, समझा दें
एक मां का फोन आया कि बेटा शादी कहीं और करना चाह रहा है। लड़की मेरे धर्म की नहीं है। बेटे को समझा दीजिए। बेटे ने पूरी बात बताई। इसके बाद उनकी मां और बेटे दोनों की काउंसिलिंग की, जिससे दोनों शांत हो गए।

पहले करियर बनाएं फिर शादी करें
एमबीए कर रही एक बेटी का किसी से अफेयर चल रहा था। मां चाहती है कि पहले वह कोर्स पूरी करे और फिर नौकरी करे। फिर शादी के बारे में सोचे। पिता जी भी नाराज थे। परिवार के तीनों सदस्यों की काउंसिलिंग की गई।

क्यों सामने आए ऐसे मामले
अब तक छिप कर जो बातें फोन पर हो जाती थीं, वह नहीं हो पा रही हैं। घर में रहकर कानाफूसी जैसी बातें करने से मां-बाप समझ जाते हैं कि ऐसी बातें कौन-किससे कर रहा है। पूछने और मां-बाप के पीछे पड़ने पर उन्हें जानकारी हो जाती है। यहीं से मां-बाप विशेषकर मां का अपने बच्चों से टकराव शुरू हो जाता है।
-डॉ. एलके सिंह, डायरेक्टर, मनोवैज्ञानिक पैनल

No comments