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कानपुर कोरोना कहर: मनपसंद खाना न मिलने से पालतू जानवर-पक्षियों का जीवन संकट में

लॉकडाउन का जितना असर आम लोगों पर पड़ा है, उससे कहीं ज्यादा पालतू विदेशी जानवर इसका शिकार हो रहे हैं। बाजार में विदेशी कुत्तों, बिल्लियों और पक्षियों के लिए मिलने वाले खास आहार की कमी हो गई है या मिल ही नहीं रहे। ऑनलाइन डिलीवरी भी नहीं हो रही है। पसंद का भरपेट भोजन न मिलने से कुत्ते अपने मालिकों के लिए खूंखार हो रहे तो प्रोटीन की कमी से बिल्लियां अंधेपन का शिकार हो रही हैं। गोरखपुर में तो कई पक्षियों की मौत तक हो चुकी है।
आमजा भारत कार्यालय संवाददाता:- जर्मन शेफर्ड, अमेरिकन पिटबुल, रॉटविलर, मैफ्टिव ब्रीड तिब्बतियन, हिमालयन, फ्रेंच और इंग्लिश ब्रीड के कुत्तों के हजारों शौकीन कानपुर में हैं। 30 से 60 किलो वजन वाले इन कुत्तों को हाई एनर्जी फूड की जरूरत होती है। प्रोटीन से इम्युनिटी सिस्टम डेवलप होता है। इसलिए डॉग फूड न मिलने पर ये हमलावर हो रहे हैं। न केवल साथी कुत्तों से लड़ रहे हैं बल्कि अपने मालिक पर भी हमला करने लगे हैं।

विदेशी नस्ल की बिल्लियों में अंधेपन का खतरा
कानपुर में पर्शियन कैट, अरेबियन कैट, बांग्ला कैट और सिमिंस नस्ल की विदेशी बिल्लियां हैं। ये चूहों का शिकार नहीं करतीं और न ही दूध की शौकीन होती हैं। कैट फूड से इन्हें टोरिन प्रोटीन मिलता है। अब बाजार में कैट फूड न मिलने से ये अंधेपन की तरफ बढ़ गई हैं। वहीं, देसी बिल्लियों को टोरिन प्रोटीन चूहे से मिल जाता है। यह प्रोटीन चूहों की त्वचा पर पाया जाता है। अब लोगों ने पेट फ़ूड आर्गेनाईजेशन से पालतू विदेशी बिल्लियां बचाने की मांग की है।

पालतू जानवरों का दूर किया जा रहा टेंशन
कानपुर में पालतू जानवर वर्तमान माहौल में चिड़चिड़े भी हो रहे हैं। परिवार का हर सदस्य लगातार घर में ही रह रहा है। इससे हलचल ज्यादा रहती है, जिससे ये बेचैन रहने लगे हैं। बाहर न निकल पाना दूसरा सबसे बड़ा कारण है, क्योंकि एक जर्मन शेफर्ड को रोजाना 5 किमी की रनिंग चाहिए। ऐसे में इन जानवरों का स्वभाव बदलने के लिए अरोमा थेरैपी की जा रही है। स्पा सैलून बंद होने के कारण पेट स्पेशलिस्ट यू-ट्यूब व वीडियो कॉल के जरिए स्पा, मसाज, मैनीक्योर और पैडीक्योर सिखा रहे हैं।

इनका यह कहना है
लॉकडाउन के कारण फूड न मिलने से कुत्ते खूंखार हो रहे हैं तो बिल्लियों में अंधेपन की आशंका बढ़ती ही जा रही है। इसके चलते पेट फूड को भी जरूरी सेवाओं में रखने की मांग की हई है ताकि उनकी होम डिलीवरी कराई जा सके। -विनय दीक्षित, अध्यक्ष, यूपी पेट्स शॉप्स वेलफेयर एसोसिएशन
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60 हजार हाई एनर्जी ब्रीड के कुत्ते हैं कानपुर में
32% प्रोटीन इन कुत्तों को डॉग फूड से ही मिलता
22 से अधिक विदेशी पालतू बिल्लियां हैं शहर में
04 माह टोरिन प्रोटीन न मिलने से ये हो जातीं अंधी
1200 किलो कैट फूड बिकता सिर्फ कानपुर में हर माह
2200 से लोगों ने लगाई बिल्लियों को बचाने की गुहार
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