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बेसहारा और बेजुबानों का कौन सहारा..?

बांदा, कृपाशंकर दुबे - लाक डाउन के दौरान आदमी तो किसी तरह से अपना पेट भर ले रहा है, उसे राशन या फिर लंच पैकेट मिल रहा है। अलबत्ता इन सड़क पर बैठे इन बेसहारा
बेजुबानों का सहारा कौन है। इनके लिए न तो चारा का इंतजाम है और न ही पानी का। भगवान के भरोसे इनकी सांसें चल रही हैं। जिला प्रशासन की ओर से भी मवेशियों के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है। 

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