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परशुराम जयंती 25 अप्रैल, अक्षय तृतीया 26 अप्रैल

वैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है इस वर्ष अक्षय तृतीया 26 अप्रैल को है इस दिन रोहिणी नक्षत्र और चंद्र वृषभ राशि में होगा  तृतीया तिथि  25 अप्रैल शनिवार को दिन 11: 51 से  प्रारंभ होकर  26 अप्रैल को  दिन 1:22 तक रहेगी  26 अप्रैल को अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त  प्रातः  5::32 से दिन 12:04 तक श्रेष्ठ है अक्षय तृतीया स्वयं सिद्ध  अबूझ मुहूर्त है जिसमें विवाह गृह प्रवेश नया व्यापार आदि सभी कार्य किए जा सकते हैं परंतु लॉक डाउन के चलते  मांगलिक कार्य संपन्न नहीं होंगे इस दिन तीर्थों में स्नान हवन शुभ कार्यों का अनंत फल मिलता है इस दिन किया गया दान अक्षय माना जाता है  इस दिन जल से भरा कलश पंखा छाता खरबूजा गाय आदि का दान किया जाता है इस बार कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण सब बंद है  लेकिन घर में अक्षय तृतीया की पूजा की जा सकती है।इस दिन माता लक्ष्मी भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए पूजा की जाती है लक्ष्मीजी  को कच्चे दूध गंगाजल से स्नान करवाकर केसर, कुमकुम से उनका पूजन करें। । भगवान विष्णु महालक्ष्मयै  मंत्र का जाप करें,  अक्षय तृतीया को बद्रीनाथ के पट भी खुलते हैं परंतु इस बार लॉक डाउन के कारण 15 मई को खुलने की घोषणा हुई है


भगवान परशुराम जी का अवतार  अपराह्न में प्रदोष काल  व्यापनी अक्षय तृतीया तिथि में हुआ था इस बार परशुराम जयंती 25 अप्रैल  शनिवार को है मान्यता  है कि परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं, परशु' प्रतीक है पराक्रम का। 'राम' पर्याय है सत्य सनातन का। इस प्रकार परशुराम का अर्थ हुआ पराक्रम के कारक और सत्य के धारक। ,पिता जमदग्नि और माता रेणुका ने तो अपने पाँचवें पुत्र का नाम 'राम' ही रखा था, लेकिन तपस्या के बल पर भगवान शिव को प्रसन्ना करके उनके दिव्य अस्त्र 'परशु' (फरसा ) प्राप्त करने के कारण वे राम से परशुराम हो गए। परशुराम ने कार्तवीर्य सहस्रार्जुन का वध किया था

 ज्योतिषाचार्य एस. एस. नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र

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