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सांस की तकलीफ फिर भी पैदल किया 140 किमी का सफर

कोरोना वायरस से बचाव के लिए लॉकडाउन के इस दौर में तमाम तरह की दुश्वारियां झेल रहे लोगों को डॉक्टरों की उपलब्धता और दवाइयाें के लिए भी जूझना पड़ रहा है। इस समय तमाम निजी डॉक्टरों ने अपनी प्रैक्टिस बंद कर रखी है
आमजा भारत सवांददाता:- सरकारी अस्पतालों में भी कोरोना से संबंधित मरीजों को ही प्राथमिकता मिल रही। ऐसे में अन्य बीमारियों से परेशान लोगों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। जिले के गांव, कस्बों की हालत तो और भी खराब है। सोमवार को मूसानगर, घाटमपुर के नगीना गांव की जय देवी (50) को ऐसी ही दुश्वारी से दो-चार हो पड़ा।

नौबस्ता चौराहे पर थकी हारी बैठीं जय देवी आठ घंटा पैदल चलकर डॉक्टर की तलाश में कानपुर पहुंची थीं। कई घंटे भटकने के बाद उन्हें मोतीझील इलाके में दवा तो मिल गई, लेकिन इतनी उम्र में 70 किलोमीटर दूर गांव पहुंचने के लिए दोबारा पैदल चलने की सोचकर कांप उठीं।

उन्होंने बताया कि उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। फेफड़ों में संक्रमण है। आसपास के क्षेत्र में कोई अच्छा डॉक्टर न मिलने की वजह से ही वे कानपुर आईं। घर में पति और बेटे नहीं हैं। दो बेटियां हैं जिन्हें घर पर ही छोड़कर आई हैं। रात होने से पहले उन्हें अपने गांव पहुंचना है। शरीर थक चुका है और पैर जवाब दे चुके हैं। लेकिन चलना तो पड़ेगा।

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