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कानपुर में 125 आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं को नहीं मिला सेनेटाइजर बनाने का लाइसेंस

आयुर्वेदिक दवा निर्माता सेनेटाइजर बनाने की अनुमति लेने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। केवल यूपी में आयुष विभाग ने अनुमति देने से इनकार कर दिया है, जबकि देश के अन्य राज्यों में आयुर्वेदिक दवा निर्माता सेनेटाइजर बना रहे हैं।
आमजा भारत कार्यालय संवाददाता:- प्रदेश में 3500 और कानपुर में 125 इकाइयां आयुर्वेदिक सेक्टर से जुड़ी हैं। एलोपैथिक फैक्टरियों की संख्या घटने के बाद इनकी संख्या तेजी से बढ़ी है। कोरोना काल में एक तरफ एलोपैथिक विभाग आनलाइन लाइसेंस जारी कर रहा है तो दूसरी तरफ आयुर्वेदिक फील्ड के कारोबारी महीने भर से इंतजार में बैठे हैँ।

फार्मास्यूटिकल आयुर्वेदिक एंड मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के सचिव मनोज अग्रवाल ने कहा कि सेनेटाइजर के लिए जरूरी आईसो प्रोफाइल एल्कोहल (आईपीए) के लिए लाइसेंस लेना जरूरी है। आयुष विभाग का कहना है कि जिन्हें वर्ष 2015 में लाइसेंस दिया गया था, वही मान्य हैं। नए लाइसेंस नहीं देंगे। मनोज अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार आयुष के बढ़ावे को लेकर गंभीर है लेकिन विभाग पलीता लगाए हैं। प्रदेश के 3500 आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं की ये बहुत बड़ी पीड़ा है कि संकट काल में भी भेदभाव किया जा रहा है। अगर जल्द रास्ता नहीं निकाला गया तो आधी इकाइयां बंदी की कगार पर आ जाएंगी।

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