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सीएचसी प्रभारी अधीक्षक के आगे बेबस आला अधिकारी

चार दिनों से हड़ताल पर डटे हैं सीएचसी के स्वास्थ्य कर्मचारी 

जसपुरा, कृपाशंकर दुबे । समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसपुरा के प्रभारी अधीक्षक के आगे तो मानो जिले के स्वास्थ्य विभाग व  प्रशासनिक अधिकारी नतमस्तक हैं। बताते चलें की पिछले चार दिनों से समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के कई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल में बैठे हुए हैं, लेकिन मीडिया द्वारा खबरें चलने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी आते तो है लेकिन वह हड़तालरत कर्मचारियों को ही धमकी एवं नसीहत देकर चले जाते हैं। अभी तक आए हुए किसी भी अधिकारी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि आखिर प्रभारी अधीक्षक कहां तक सही है। यहां तक कि सोमवार को हड़तालरत सभी कर्मचारी जा चुके थे, तब शाम को पांच बजे आए
धरने पर बैठे सीएचसी जसपुरा के स्वास्थ्य कर्मचारी
सीएमओ डाक्टर संतोष कुमार ने कर्मचारियों को एक मैसेज दिया कि आप लोग अपनी हड़ताल बंद कर दें नहीं तो आप लोगों के खिलाफ पुलिस में कार्यवाही की जाएगी। जबकि उन्होंने कभी यह जानने की कोशिश नहीं की की प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक क्या कर रहे हैं। यह हड़तालरत कर्मचारी क्यों बैठे हैं। 
बताते चलें की प्रभारी अधीक्षक अपने आप को सत्ता पक्ष के एक प्रभावशाली नेता का रिश्तेदार एवं जिले के पूर्व जिलाधिकारी को अपने रिश्तेदार बताकर कर्मचारियों का खूब आर्थिक, मानसिक शोषण करते रहे हैं जिस भी कर्मचारी ने आवाज उठाने की कोशिश की तो उसके खिलाफ अपनी कार्यवाही से लेकर पुलिसिया कार्यवाही भी कराई, जिन कर्मचारियों ने अपनी आवाज जिले के अधिकारियों तक पहुंचाई तो जिले के अधिकारियों ने हमेशा से ही उनको गलत ठहराया है। 

आखिर यह कैसा वर्गवाद है
जसपुरा। हड़तालरत कर्मचारी ने बताया कि इस अस्पताल में कई अधीक्षक साहब की जाति के कई कर्मचारी हैं, जो महीने में चंद दिन ही आते हैं। फिर भी उनका वेतन जल्दी एवं आसान तरीके से निकल जाता है। जबकि हम लोग परमानेंट आते हैं फिर भी हमारा वेतन जल्दी नहीं मिलता। इसका प्रमाण अस्पताल में लगे हुए सीसीटीवी कैमरे में देखा भी जा सकता है। अभी सरकारी आदेश भी आया था कि त्योहार से पहले सभी कर्मचारियों का वेतन दे दिया जाए, लेकिन चंद कर्मचारियों के अलावा अन्य सब लोगो का वेतन 16 तारीख को दिया गया है।

अधीक्षक की गुंडई सिर चढ़कर बोल रही 
जसपुरा। शनिवार को आते ही प्रभारी अधीक्षक ने अस्पताल परिसर में हड़तालरत कर्मचारियों एवं उनके परिजनों के साथ गाली-गलौज की। इतना ही नहीं झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देने से भी गुरेज नहीं किया जा रहा है। 

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