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हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गया युवक साहा

हमीरपुर, महेश अवस्थी । जरा याद करो कुर्बानी के तहत गोपी मोहन साहा की पुण्य तिथि पर आयोजित कार्यशाला में डा. भवानीदीन ने कहा कि साहा सही मायने में भारत माता के सच्चे सपूत थें। जिन्होने आजादी के लिए मात्रवेदी में आत्माहूती दी थी। वें केवी शिवहरे महाविद्यालय सिसोलर में कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होने कहा कि बंगाल का एक युवक 23 साल की उमर में फांसी के फंदे पर झूल गया। कितनी बड़ी कुर्बानी थी।
कार्यशाला में बोलते हुए डा. भवानीदीन
इसका सहज अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साहा का देश के प्रति एक सर्वाच्च बलिदान था। अंग्रेज मजिस्ट्रेट क्रांतिकारी आंदोलन को कुचल रहा था। जहां उसे गोली मारी गयी मगर युरोपियन व्यापारी मारा गया। जिसे जानकारी होने पर साहा को बडा दुख हुआ। उसे अदालत ने फांसी की सजा सुनायी और 23 साल की उम्र वे वह हस्ते हस्ते फांसी के फंदे पर झूल गया। आज देश की युवा पीढ़ी इस सरफरोस युवा को नही जानती। डा. श्यामनारायण, डा. लालता प्रसाद, आरती गुप्ता, नेहा यादव, देवेन्द्र त्रिपाठी, सुरेश सोनी, हिमांशु सिंह ने भी विचार रखे।

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