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बेमौसम बारिश से सर्वाधिक नुकसान लाही को

हमीरपुर, महेश अवस्थी । बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और अन्ना मवेशियों के कारण किसानों ने इस बार अधिकांश खेतों में लाही बोई थी, लेकिन सर्द मौसम में बारिश व कोहरे की वजह से लाही की फसल को सर्वाधिक नुकसान हुआ। इस बार 70 किलो से लेकर दो क्विंटल तक प्रति बीघा पैदावार होने से ज्यादातर किसान 
मेहनत के साथ लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं। परेशान किसानों को अभी भी मौसम की मार झेलनी पड़ रही है। वहीं लाही का बाजार भाव भी अलग है, जो 3100 से 3400 रुपये प्रति क्विंटल तक है। इस समय मंडी में नई फसल की लाही की आवक प्रारंभ हो गई है। सोमवार को मंडी में करीब 300 क्विंटल लाही की बिक्री हुई। जबकि बीते वर्ष लाही की पैदावार 2 से 3 क्विंटल प्रति बीघे पैदा हुई थी। कस्बे की मंडी समिति में लाही बेचने आने वाले किसान फसलों की पैदावार को लेकर बेहद किसान चिंतित दिखे।

मौसम ने फेरा अरमानों पर पानी
हमीरपुर। पारा निवासी किसान गया प्रसाद ने बताया उसने 10 बीघा खेत 30 हजार रुपये में ठेका पर लेकर लाही बोई थी। इसमें लगभग 50 हजार का खर्च आया, लेकिन पैदावार 70 किलो प्रति बीघा हुई है। कुल पैदावार 7 क्विंटल निकली है। जिससे लागत ही नहीं निकल सकी है। कहा बीते वर्ष इसी खेत में 30 क्विंटल लाही पैदा हुई थी।

मवेशियों के भय से बोई थी लाही
हमीरपुर। भमौंरा के किसान शब्बीर खां ने बताया कि उसने इस वर्ष अन्ना मवेशियों के भय से गेहूं के स्थान पर 50 बीघे में लाही की फसल बोई थी। लेकिन मौसम ने साथ नहीं दिया और हर माह बारिश व कुछ दिन पूर्व ओलावृष्टि से फसल बेहद कमजोर हो गई। इस बार डेढ़ से दो क्विंटल ही पैदावार हुई है।

40 किलो प्रति बीघा निकली पैदावार
हमीरपुर। मंडी आए गुरदहा निवासी प्रदीप यादव ने कहा उसने 70 बीघे में लाही बोई थी। लेकिन डेढ़ सौ से अधिक वन गायों ने उसकी फसल चैपट की। उन्हें जंगली बताकर किसी भी गोशाला में बंद नहीं किया गया। अब जो लाही की फसल बची है, उसकी कटाई की मजदूरी भी नहीं निकल पा रही है।

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