Latest News

एसएनसीयू ने दिया चुनकी की बच्ची को नया जीवन

उचित इलाज मिला तो बर्थ एस्फिक्सिया से हुआ बचाव   

बांदा, कृपाशंकर दुबे । जसपुरा ब्लाक के गज पुरवा में रहने वाली 22 वर्षीय चुनकी ने 6 फरवरी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसपुरा में एक बच्ची को जन्म दिया था, जन्म के तुरंत बाद वह बर्थ एस्फिक्सिया (सांस लेने में अवरोध) की शिकार हो गई। प्रभारी चिकित्सक ने उसे तुरंत जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। जिला महिला अस्पताल में बने एसएनसीयू (सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट) में पंद्रह दिन तक डाक्टरों और स्टाफ नर्सों की कड़ी कोशिशों के बाद आखिरकार चुनकी की बच्ची की जान बचाने में सफलता मिल गई।   
स्वस्थ हालत में मां की गोद में चुनकी
एसएनसीयू प्रभारी डा. एचएन मिश्रा बताते हैं कि एसएनसीयू में इस वर्ष अप्रैल माह से अब तक कुल 1350 बच्चे भर्ती हुए जिनमें से 386 जिला अस्पताल से और 964 अन्य जगहों से संदर्भित होकर आए थे। इनमें से 570 बच्चे बर्थ एस्फिक्सिया के शिकार थे। इसका सबसे बड़ा कारण प्रसवपूर्व और प्रसव के समय उचित चिकित्सीय देखभाल का न मिलना था। जिला महिला अस्पताल में स्थापित एसएनसीयू यानि सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट जनपद में जन्मे उन हजारों बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही है जो जन्म के तुरंत बाद किसी न किसी तरह के जोखिम के शिकार हो जाते हैं। बर्थ एस्फिक्सिया के अलावा नवजात सेप्सिस, जन्म के समय कम वजन, समय से पहले जन्म, रिफ्यूजल फीड आदि के शिकार बच्चों का भी यहाँ उपचार किया जाता है। जिला महिला अस्पताल में स्थित 12 बेड के सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट में फोटोथेरेपी, बेबी वार्मर, इन्फ्यूजन पंप, आक्सीजन कंसन्ट्रेटर, सक्शन, नेबुलाइजर, इन्फेन्टोमीटर आदि उपकरणों से लैस है। एसएनसीयू के साथ ही एक कंगारू मदर केयर (केएमसी) यूनिट भी है जिसमें नवजात को गर्मी प्रदान करने के लिए मां की छाती से चिपकाकर रखा जाता है। 

टल सकता है बर्थ एस्फिक्सिया का खतरा: सीएमएस 

बांदा। जिला महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. ऊषा सिंह बताती हैं कि प्रसव के बाद नवजात की स्वास्थ्य जटिलता के साथ-साथ प्रसव से पहले मां की स्वास्थ्य जटिलता भी बर्थ एस्फिक्सिया का कारण हो सकती है। मां का एनीमिक होना, संक्रमण, उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह जैसी समस्याएं भी मां से प्लेसेंटा में आक्सीजन की सप्लाई को बाधित कर सकती हैं जिससे बिर्थ एस्फिक्सिया हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप नवजात में शारीरिक व मानसिक अपंगता आ सकती है, गंभीर अवस्था में नवजात की मृत्यु भी हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि गर्भावस्था के दौरान समय से प्रसवपूर्व जांच कराएं, प्रसव के लिए समय से अस्पताल आएं और प्रसव अस्पताल में ही कराएं।
एसएनसीयू में भर्ती नवजात बच्चे 

जन्म के बाद यदि बच्चा न रोये तो हो जाएं सावधान 

बांदा। बर्थ एस्फिक्सिया वह स्थिति है जब जन्म के समय बच्चे के शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। ऐसे में सही समय पर नवजात को उचित देखभाल न मिले तो उसकी जान को खतरा हो सकता है। यदि जन्म के तुरंत बाद बच्चा रोता नहीं है तो बर्थ एस्फिक्सिया का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में तुरंत उसे जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराएँ। जरूरत पड़ने पर 102 या 108 नंबर पर एम्बुलेंस से संपर्क कर सकते हैं। 

No comments