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लॉकडाउन: फोन पर सिसक कर बोले पिता, सब आ रहे हैं तुम कब आओगे

लॉकडाउन में कई दिनों से कानपुर दादानगर में फंसे पृथ्वी कुमार की शुक्रवार रात पिता महेश से फोन पर बात हुई। पिता ने रुंधे गले से पूछा, बेटा सब लौट रहे हैं अब तुम भी किसी तरह घर आ जाओ। घर पहुंचने की ललक में 700 किमी की दूरी और सफर की दुश्वारियों की परवाह किए बगैर वह पैदल ही पांच साथियों के साथ अपने घर बिहार के दरभंगा के लिए निकल पड़ा है।
आमजा भारत सवांददाता:- छह घंटे में पैदल सभी उन्नाव पहुंचे। उनकी हालत देख मोहल्ला आदर्शनगर में ड्यूटी पर तैनात दरोगा रामजीत यादव ने सभी के लिए भोजन की व्यवस्था की। आसपास के लोगों ने भी सहयोग किया। कुछ देर थकान मिटाने के बाद सभी फिर अपनी मंजिल की ओर बढ़ चले।
दरभंगा जिले के एकहुआ गांव निवासी पृथ्वी एक साल से कानपुर के दादानगर स्थित एक नमकीन फैक्टरी में काम कर रहा है। गांव के ही रवींद्र, प्रमोद, नरेंद्र यादव और चंदन यादव भी काम करते हैं। लॉकडाउन के बाद से सभी फैक्टरी में ही रुके थे। शुक्रवार रात पिता से बातचीत के दौरान उनकी परेशानी और सिसकती आवाज सुनकर पृथ्वी ने घर जाने की ठान ली।
साथियों का साथ भी मिल गया। साधन के अभाव में शनिवार सुबह सभी अपने सामान लेकर पैदल ही 700 किमी लंबे सफर पर निकल पड़े। दोपहर करीब एक बजे उन्नाव शहर के आदर्श नगर पहुंचे पृथ्वी ने बताया कि 30 किमी की दूरी में उन्हें जगह-जगह पुलिस के सवालों का सामना करना पड़ा।

सभी भूख-प्यास से अधिक पुलिस से खौफजदा थे। यहां पहुंचने पर विधायक पंकज गुप्त और जिला अस्पताल चौकी प्रभारी रामजीत ने लंच पैकेट की व्यवस्था की। लोगों ने बिस्कुट, नकमीन व चाय भी दी

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