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गुलाल से बच्चो ने आचार्यो के साथ खेली होली

हमीरपुर, महेश अवस्थी । सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कालेज हमीरपुर मे होलिकोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत संगीताचार्य ज्ञानेश जड़िया ने सरस्वती वन्दना से की। प्रधानाचार्य रमेशचन्द्र ने कहा कि बसन्त ऋतु मे मनाया जाने वाला यह एक महत्वपूर्ण भारतीय व नेपाली लोगो का त्योहार है। यह पर्व हिन्दू पंचाग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। रंगो का त्योहार कहा जाने वाला यह पर्व पारम्परिक रुप से दो दिन मनाया जाता है। पहले दिन होलिका जलायी जाती है जिसे होलिका दहन भी कहते है। दूसरे दिन रंग अबीर गुलाल से
गुलाल लगाते शिक्षक
होली खेलते है तथा ढोल बजाकर होली के गीत गाये जाते है। इसे प्रमुख रुप से दुरेंड़ी, धुरखेल या धूलिवंदन आदि के नाम से जानते है। ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूलकर गले मिलते है और फिर से दोस्त बन जाते है। विद्यालय के आचार्य रामप्रकाश अवस्थी ने कहा कि जैसे ही होलिका आग मे प्रहलाद को लेकर बैठी तो ईश्वरीय कृपा से प्रहलाद बच गये और होलिका का दहन हो गया। विद्यालय की अंजलि व मुकुल कुशवाहा ने भी विचार रखें। श्रृष्टि एवं मोनू पाण्डेय ने सामूिहक गीत प्रस्तुत किया। स्टाफ एवं छात्र छात्राओ ने सभी को रंग गुलाल लगाकर तथा हल्दी चावल से तिलक कर सभी को होली की शुभ कामनायें दी। संचालन आचार्य बलराम सिंह ने किया।

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