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गजब: कोई सड़क पर दौड़ा तो कोई रेलवे ट्रैक पर

कानपुर से चलकर बांदा तक रेलवे ट्रैक पर चलकर आया युवक 
कोई सूरत से तो कोई दिल्ली से पैदल चलकर घर वापस आया 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । कोरोना वायरस के संक्रमण की साइकिल कमो तोड़ने के लिए जिस तरह से पूरे देश में रेल और सड़क मार्ग पर चलने वाले वाहनों तथा रोडवेज बसों का चक्का जाम कर दिया गया है, उससे परदेश में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी फजीहत हो गई है। कोरोना वायरस के संक्रमण से खौफजदा परदेशी अपने घर आकर ‘अपनों’ के पास रहना चाह रहे हैं। वाहन जब नहीं मिला तो हौसले को अपनी ताकत बनाते हुए किसी परदेशी ने रेलवे ट्रैक को अपना रास्ता बना लिया तो किसी ने सैकड़ों किलोमीटर सड़क नाप डाली। बांदा पहुंचने के बाद सबसे पहले अस्पताल पहुंचकर चेकअप कराया और फिर अपने घर को रवाना हो गए। 108 एंबुलेसों के जरिए परदेशियों को चेकअप के बाद उनके घर तक भिजवाया गया। 
रोजी-रोटी कमाने के लिए परदेश गए लोगों के सामने अब बड़ी मुसीबत है। रोजी-रोटी का ठिकाना उनसे छिन गया। पेट भरने के लिए जब रोटी नहीं मिलने लगी तो लोग परदेश छोड़कर अपने घर वापस लौटने की ठान ली। लेकिन दिक्कत तो तब हो गई जब कोई वाहन उन्हें घर जाने के लिए नहीं मिला। इससे परेशान लोग अपना कुछ सामान लेकर पैदल चल पड़े। देहात कोतवाली क्षेत्र के जौरही गांव निवासी मातादीन (25) पुत्र गयाप्रसाद कानपुर के लोहा प्लांट में काम करता है। लाक डाउन घोषित हो जाने के बाद उसे कोरोना का खौफ सताने लगा तो वह घर जाने को बेताब हो गया। जब कोई रास्ता उसने नजर नहीं आया तो उसने बांदा-कानपुर रेलवे ट्रैक को अपना रास्ता बना लिया। कानपुर से लेकर बांदा तक वह रेलवे ट्रैक पर ही पैदल चलता हुआ आया। शुक्रवार की दोपहर बांदा आया मातादीन सीधे जिला अस्पताल पहुंचा। जिला अस्पताल में उसने मीडिया कर्मियों को बताया कि वह वाहन न मिलने के कारण रेलवे ट्रैक पर ही पैदल चलता हुआ बांदा आ गया। 
इसी तरह मटौंध थाना क्षेत्र के करछा गांव निवासी वीर सिंह, छोटू और एक अन्य युवक सूरत में रहते थे। वह लोग भी पैदल गुरुवार की रात को अपने गांव पहुंच गए। सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंचने के बाद शुक्रवार की सुबह ग्रामीणों ने उन्हें एंबुलेंस के जरिए जिला अस्पताल भेज दिया, वहां उनकी जांच की गई। तीनो युवकों ने बताया कि वह लोग 150 किलोमीटर तो वाहनों से आए। इसके बाद फिर उन्हें पैदल ही सफर करना पड़ा। इसी तरह नरैनी कोतवाली के पनगरा गांव निवासी मनोज, कल्लू, करन, धर्मेन्द्र, छत्रपाल, लल्लू शुक्रवार की सुबह जिला अस्पताल पहुंच गए। वहां पर उनकी जांच कराई गई। इन लोगों का कहना है कि वह लोग अलग-अलग साधनों से दिल्ली से कुछ दूर तक आए हैं। इसके बाद पैदल बांदा आए हैं। इन सभी की जांच कराने के बाद सीएमओ के निर्देश पर 102 एंबुलेंस के ईएमटी अनुज, अनूप, चालक विजय और भगत सिंह के द्वारा दो गाड़ियों से उन्हें गांव तक भेजा गया। 

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