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अमावस्या: रामघाट, परिक्रमा मार्ग में सन्नाटा

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरी । चैत्र मास की अमावस्या में कोरोना वायरस के चलते आस्थावानों ने घरों से ही मां मंदाकिनी, भगवान कामदनाथ व मत्यगजेन्द्रनाथ महाराज की आराधना की। भगवान श्रीराम की तपोस्थली चित्रकूट में पहली बार ऐसा नजारा दिखा। रामघाट, परिक्रमा मार्ग समेत प्रमुख मठ-मंदिरों में सन्नाटा रहा। जहां
रामघाट में पसरा सन्नाटा
लाखों श्रद्धालुओं का हुजूम अमावस्या के दिन मां मंदाकिनी में डुबकी लगाते और मत्यगजेन्द्रनाथ मंदिर से लेकर कामतानाथ, परिक्रमा मार्ग में भारी भीड उमड़ती थी, वहीं इस अमावस्या पर कोरोना वायरस से निपटने को लोग खासा सतर्क रहे। शासन-प्रशासन के व्यापक अपील के चलते आस्थावानों ने घरों से ही भगवान कामदनाथ से प्रार्थनाएं की। परिक्रमा क्षेत्र में रहने वाले साधु-संत परिक्रमा लगाते देखे गए। ट्रेने, परिवहन बसें बंद होने से आस्थावान नहीं आ सके। 

बाहर से आए लोग खुद को करें आइसोलेट
मऊ (चित्रकूट)। दूसरे प्रांतों से लोगों की घर वापसी से न सिर्फ संबंधित गांवों में बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी भय का वातावरण व्याप्त हो रहा है। कोरोना महामारी के विकराल रूप से डरे सहमे हैं। ट्रेनें बंद हो जाने के
सूना परिक्रमा मार्ग, मंदिर
बावजूद भारी तादाद में आने से पूरा इलाके में हलचल बढ़ गई है। महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, नोएडा से हजारों कामगारों ने घर वापसी की है। कोरोना संक्रमण का यथोचित जांच व इलाज का अभाव है। हालांकि प्रदेश सरकार ने 25, 26 व  27 मार्च तक लॉकडाउन की घोषणा कर दी है, परंतु बाहर से आए कामगारों को जब तक आइसोलेट नहीं किया जाता खतरा बना रहेगा।

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