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स्क्रीनिंग: मरीज आया, पर्चा दिखाया और चला गया

बाहर से आए 1571 लोगों की स्क्रीनिंग का दावा 
कोरोना वायरस काउंटर में बने सिर्फ 197 पर्चे 
ट्रामा सेंटर के काउंटर में 1374 मरीज दर्ज 
 
बांदा, कृपाशंकर दुबे । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि परदेश से लौटने वाले कामगारों को घर भेजने के पहले उनकी जांच कराई जाए, इसके बाद उन्हें क्वारंटाइन किया जाए। लेकिन स्थानीय जिला अस्पताल में ऐसा नहीं हो रहा है। कोरोना वायरस से संक्रमित संदिग्ध मरीज जो परदेश से अपने घर वापस लौटे हैं, उनकी स्क्रीनिंग करने के नाम पर बड़ा खेल किया जा रहा है। संदिग्ध मरीजों के पर्चा बनवाने के बाद डाक्टर उनका पर्चा देखने के बाद ही चलता कर रहे हैं। अलबत्ता स्क्रीनिक की प्रक्रिया को पूरा किए बिना ही परदेश से आए लोगों को वापस किया जा रहा है। चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की यह कारगुजारी आगामी दिनों में विस्फोटक स्थिति ला सकती है। ताज्जुब की बात है कि स्थानीय जिला अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इतने गैर जिम्मेदार कैसे हो सकते हैं, यह तो खुलेआम लोगों की जिन्दगानी से खेलना ही कहा जाएगा। 
जिला अस्पताल के पर्चा काउंटर में लगी बाहर से आए लोगों की भीड़
सोमवार की शाम से लेकर मंगलवार की शाम तक जिला अस्पताल में बनाए गए कोरोना वायरस काउंटर में 197 बाहर से आए लोगों ने पर्चे बनवाए। इसके साथ ही ट्रामा सेंटर के काउंटर में 1374 लोगों को दर्ज किया गया। कुल मिलाकर 1571 बाहर से आए लोगों ने अपनी स्क्रीनिंग कराई, ऐसा दावा जिला अस्पताल प्रशासन कर रहा है। इधर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की सुस्ती और उनकी बेपरवाही की बदौलत स्क्रीनिंग के काम में लगे डाक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारी बाहर से आए लोगों को वैसे भी छूने से कतराते हैं, अलबत्ता ज्यादातर लोगों के पर्चे देखकर और पूछतांछ कर मरीजों को चलता कर दिया जा रहा है। स्क्रीनिंग की प्रक्रिया को ही नहीं अंजाम दिया जा रहा है। ऐसा नहीं होना चाहिए। स्क्रीनिंग के नाम पर चिकित्सकों की यह कारगुजारी आगामी दिनों में कितनी विस्फोटक स्थिति खड़ी कर सकती है, इसका अंदाजा लगा पाना मुमकिन नहीं है। एक तरह से यूं कहा जाए कि यह लोगों की जिन्दगी से खुलेआम खिलवाड़ है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और जिला प्रशासन के अधिकारी इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। हालात तो अब यहां तक पहुंचते जा रहे हैं कि स्क्रीनिंग करने वाले चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की निगेहबानी के लिए भी पहरा लगाने की जरूरत है। 
 
38 किलोमीटर भाई को बैठकार दौड़ाई साइकिल 
बांदा। कोरोना संक्रमण की साइकिल को तोड़ने के लिए 21 दिन का लाक डाउन किया गया है। ऐसे में कोई भी वाहन नहीं चलाया जा रहा है। लोग पैदल या साइकिल से या फिर अन्य तरीकों से इमरजेंसी में अपने गंतव्य को पहुंच रहे हैं। अतर्रा थाना क्षेत्र के पिंडखर गांव निवासी नंदकिशोर की डायलिसिस जिला अस्पताल स्थित हीमो डायलिसिस सेंटर में होती है। वाहन 
स्क्रीनिंग के इंतजार में लाइन लगाए गए बाहर से आए लोग
न मिलने के कारण वह मंगलवार की सुबह नंदकिशोर को उसके बड़े भाई ने साइकिल पर बैठाया और 38 किमी का सफर तय करते हुए जिला अस्पताल पहुंचा। वहां पर नंदकिशोर डयलिसिस हो सकी और वापस भी साइकिल से ही रवाना हुआ। 

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