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नहीं कराई गई संभावित कोरोना पीड़ित के ब्लड सेंपल की जांच

राजकीय मेडिकल कालेज प्राचार्य और सीएमओ ने गाइड लाइन का दिया हवाला 
कृषि विश्वविद्यालय के छात्र को नार्मल खांसी जुकाम, फीवर पीड़ित बताया जा रहा 
कल तक कोरोना होने का हो रहा था दावा, अब स्वास्थ्य विभाग ने पीछे खींचे कदम 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । आंध्र प्रदेश के तिरुपति से खेलकर वापस विश्वविद्यालय लौटे छात्र को गुरुवार के दिन जिला अस्पताल से मेडिकल कालेज रेफर किया गया था। चिकित्सकों ने यह दावा किया गया था कि छात्र संभावित कोराना वारयस से पीड़ित है। राजकीय मेडिकल कालेज के आईसुलेशन वार्ड में उसे भर्ती भी किया गया था। शुक्रवार को यह खबर सुर्खियां बनीं तो स्वास्थ्य विभाग के साथ ही प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई। रात गुजरने के बाद शुक्रवार सुबह दूसरा ही राग अलापा जा रहा है। कहा जा रहा है कि छात्र को नार्मल खांसी, जुकाम और बुखार है। गाइड लाइन का हवाला देते हुए राजकीय मेडिकल कालेज प्राचार्य ने छात्र का ब्लड सैंपल जांच के लिए नहीं भेजा है।
नरैनी रोड स्थित राजकीय मेडिकल कालेज में भर्ती है छात्र प्रशांत
अंबेडकर नगर जिले का रहने वाला प्रशांत (24) विश्वविद्यालय में बीएससी कृषि प्रथम वर्ष का छात्र है। एक मार्च को वह अपने 27 अन्य साथी छात्रों और दो शिक्षकों के साथ आंध्र प्रदेश के तिरुपति राष्ट्रीय स्तर के आयोजित होने वाले खेल प्रतियोगिता में शामिल होने गया था। वहां पर खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित हो गया। सात मार्च को प्रशांत विश्वविद्यालय वापस आ गया जबकि उसके अन्य 27 छात्र वहां से अपने-अपने घर को चले गए। गुरुवार को छात्र जिला अस्पताल पहुंचा। वहां पर चिकित्सक ने कोरोना वायरस के लक्षण पाए जाने की बात कहते हुए तत्काल मेडिकल कालेज रेफर कर दिया था। मेडिकल कालेज पहुंचने पर तत्काल छात्र को आईसुलेशन वार्ड में भर्ती कर लिया गया। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. संपूर्णानंद मिश्र ने कोरोना वायरस से संबंधित लक्षण बताए थे। मेडिकल कालेज के एक प्रवक्ता ने भी संभावित कोरोना वायरस के लक्षण होने की बात कहते हुए छात्र को भर्ती करने और उसका ब्लड सेंपल जांच के लिए भेजे जाने की बात कही थी। लेकिन रात गुजरते ही जब सुबह यह खबर सुर्खियां बनीं तो स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई। पता नहीं क्या हुआ कि राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य मुकेश यादव ने गाइड लाइन का हवाला देते हुए कहा है कि छात्र नार्मल खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित है। इसलिए उसका ब्लड सेंपल जांच के लिए नहीं भेजा गया है। वह कोरोना वायरस पीड़ित नहीं है। मेडिकल कालेज प्राचार्य का यह बयान लोगों के गले नहीं उतर रहा है। अगर छात्र कोरोना वायरस से पीड़ित नहीं है तो फिर जांच कराने में मेडिकल कालेज प्रशासन आनाकानी क्यों कर रहा है और छात्र को सजायाफ्ता कैदियों की तरह तनहाई में क्यों रखा गया है? सूत्रों का तो यहां तक दावा है कि मेडिकल कालेज का कोई भी चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी संभावित कोरोना वारयस पीड़ित के पास जाने तक को तैयार नहीं है। ऐसे में छात्र के ब्लड सेंपल की जांच न कराया जाना कहां तक उचित है। 

मेडिकल कालेज प्रशासन की चूक बन सकती है बड़ी मुसीबत 
बांदा। गाइड लाइन का हवाला देते हुए जिस तरह से मेडिकल कालेज प्रशासन छात्र प्रशांत का ब्लड सेंपल जांच के लिए नहीं भेज रहा है और गाइड लाइन का हवाला देते हुए उसे कोरोना पीड़ित नहीं होने का दावा कर रहा है, अगर यह मेडिकल कालेज की चूक साबित हुई तो आने वाले समय में यह बीमारी कितने लोगों को अपनी चपेट में ले चुकी होगी, इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। वहीं जिन चिकित्सकों ने पीड़ित छात्र को कोरोना पीड़ित बताया था, आखिर उन्होंने किस आधार पर इतनी बड़ी बात कही थी। या तो वह सभी चिकित्सक जिन्होंने छात्र को देखा था उनकी बात गलत है या फिर जो मेडिकल कालेज प्रशासन व मुख्य चिकित्साधिकारी डा. संतोष कुमार के द्वारा दावा किया जा रहा है वह गलत है। दोनो में से यदि कोई भी गलत निकलता है तो इसका खामियाजा इन लोगों को नहीं बल्कि आम जनता को भुगतना होगा। 

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