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सांडर्स का वध कर माहौर ने चौदह साल जेल में बितायें

हमीरपुर, महेश अवस्थी । भगवान दास माहौर की पुण्य तिथि पर कार्यशाला में प्राचार्य डा. भवानीदीन ने कहा कि माहौर में असि व मसि में बेहतरीन संगम था। मध्य प्रदेश के दतियां जिले के बढौनी गांव में जन्में इनके दो भाई और एक बहन थी। बाद में इनके पिता झांसी आकर बस गये इनके मामा नाथूराम माहौर जानेमाने साहित्यकार थे। मास्टर रूद्र नारायण ने झांसी में जब व्यायाम शाला खोली तो वहां सचीन्द्रनाथ बक्शी युवाओं को सशस्त्र क्रान्ति का प्रशिक्षण देते थे। यहां महौर की मुलाकात चन्द्रशेखर आजाद से हो गयी। आजाद ने माहौर को
कार्यशाला में बोलते डा़ भवानीदीन
कुशन निशानेबाज बना दिया। माहौर के दल के नाम कैलाश था ग्वालियर के एक मकान में इन्होने बम फैक्ट्री बनायी। 1928 मंे जब साईमन कमीशन के विरोध में लाला लाजपत राय पर लाठिया चली, उनकी मौत हो गयी। इस राष्ट्रीय अपमान का बदला लेने के लिए भगवानदास माहौर की टीम ने लाहौर जाकर दिन दहाडे़ सांडर्स का वध किया। इस पर माहौर को आजीवन कारावास की सजा हुयी। 1945 में वे जेल से रिहा हुए। वे 14 साल तक जेल में रहे। कार्यशाला में डा़ श्यामनारायण, डा़ लालताप्रसाद, प्रदीप यादव, हिमांशु सिंह, रामप्रसाद गंगादीन, प्रत्यूश त्रिपाठी, नेहा यादव ने विचार रखे। ड़ा रमाकान्त पाल ने संचालन किया। 

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