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पर्यटन स्थल घोषित करने दरकार

हमीरपुर, महेश अवस्थी । यमुना नदी के तट पर संन्यासी की भांति एक वृक्ष अरसे से डटा खड़ा है। जिसे कल्पवृक्ष के नाम से जाना जाता है। सरकारी तन्त्र की उपेक्षा के कारण यह अभी तक पर्यटक स्थल घोसित नही हो सका है। जबकि यहां बडी संख्या में जिले और जिसे से बाहर के लोग दर्शन करने आते है। इस वृक्ष की विशेषता है कि इसमें 6 महीने पत्तियां रहती है और 6 महीने बिना पत्ती के रहता है। अगस्त के महीने में सफेद रंग का कमल की तरह इसमें फूल निकलता है। इस फूल के अंदर भी वृक्ष की पूरी आकृति निकलती है। इस पेड की
हमीरपुर में यमुना तट पर कल्पवृक्ष
विशेषता है कि यह चैडाई में अधिक बढता है, जबकि उचांई में कम। इस पेड की उम्र का सही अंदाजा नही लगाया जा सका है। आर्युवेद की दृष्टि से कल्पवृक्ष एक दुर्लभ वृक्ष है जिसके जड़ तना छाल, पत्ती और फूल तमाम प्रकार की बीमारियों में इस्तेमाल किया जाता है। 1998 में तत्कालीन वनाधिकारी के के सिंह ने इसकी उम्र पता लगाने के लिए आईसीएफआरआई देहरादून और सिलवासाउथ कानपुर देहरादून को पत्र लिखा था। इसी प्रकार पूर्व जिलाधिकारी संजय भाटियां ने इस वृक्ष को बचाने के लिए यमुना नदी मंे तटबंध बनाने के लिए मौदहा बांध को पत्र लिखा। जो कि सार्थक रहा। तटबंध बनने से कल्पवृक्ष यमुना नदी में तो जाने के बन गया। तत्कालीन जिलाधिकारी श्रीनिवास ने पर्यटन स्थल बनाने के लिए यहां पार्क बनवाया, दो नावे भी डलवा दी थी। जो बाद में रखे रखे सड गयी। अब कल्पवृक्ष स्थल के विकास की दरकार है। मौजूदा में यह असमाजिक तत्वों का अड्डा बनकर रह गया है। प्रदेश में 12 बंकी के बाद यह दूसरा कल्पवृक्ष है। 

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