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...तो अब पीएसी और आर्मी को संभालनी चाहिए लाकडाउन की कमान

21 दिवसीय लाक डाउन का पालन करा पाना पुलिस के बूते से बाहर 
सुबह बाजारों में उमड़ रही फिर, दिन में घरों से निकल रहे हैं लोग 
पीआरबी वाहनों में सवार पुलिस कर्मी, गाड़ी में बैठकर बस घूम रहे 
 
बांदा, कृपाशंकर दुबे । कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए 21 दिवसीय लाक डाउन का पालन पुलिस फिलहाल नहीं करा पा रही है। सात दिन का समय गुजर गया है लेकिन अफसोस कि अभी तक सख्ती के साथ लाक डाउन का पालन नहीं हुआ है। लोग बेधड़क अपने घरों से निकलते हैं और पुलिस टुकुर-टुकुर देखती रहती है। चैराहों पर तैनात पुलिस भी थककर चूर हो जाती है और कुर्सियों में बैठ जाती है। लोग आते-जाते हैं लेकिन उन्हें कोई नहीं रोकता है। देखा जाए तो अब पीएसी और आर्मी को लाक डाउन का पालन कराने के लिए लगाया जाना चाहिए, तभी लाक डाउन का सही तरीके से पालन हो पाएगा और 21 दिवसीय लाक डाउन जिस मंशा से किया गया है, वह पूरी हो सकेगी। 
कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए देश व्यापी 21 दिन का लाक डाउन तो किया गया है, लेकिन इसका पालन करा पाना पुलिस के बूते का नहीं है। अब तो पीएसी और आर्मी को तैनात
रोडवेज के बाहर वाहन के वाहन के इंतजार में बैठे बाहर से आए लोग
करने की जरूरत है। तभी लाक डाउन का सख्ती से पालन हो सकेगा। वरना कोरोना वायरस के संक्रमण को रोक पाना मुमकिन नहीं होगा। पुलिस कर्मी बड़े ही आराम के साथ चैराहों पर बैठे रहते हैं और लोग पैदल या फिर दोपहिया व चैपहिया वाहनों से निकल रहे हैं। प्रधानमंत्री के आवाहन पर एक दिन के जनता कफ्र्यू में लोगों ने जो सहयोग किया वह बहुत ही सराहनीय रहा। लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकले। जनता कफ्र्यू का जनता ने बेहतर तरीके से पालन किया, इसी गलतफहमी में 21 दिन के लाक डाउन का पालन कराने के लिए पुलिस कर्मियों के कंधों पर ही जिम्मेदारी रख दी गई है। लेकिन खाकी वर्दीधारी लाक डाउन का पालन करा पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। सुबह 6 बजे से 9 बजे तक बाजार में जिस तरह की अंधाधुंध भीड़ उमड़ रही है, उससे जहां लाक डाउन की धज्जियां उड़ रही हैं, वहीं सोशल डिस्टेंसिंग भी नहीं हो पा रही है। ऐसे में कोरोना वायरस के संक्रमण को कैसे रोका जा सकता है। हालात के मद्देनजर अब तो पीएसी और आर्मी को सड़क पर उतारे जाने की जरूरत है, ताकि एक भी सख्श अपने घरों से बाहर निकलने की हिम्मत न जुटा सके। भले ही इसके लिए आर्मी और पीएसी को सख्ती बरतनी पड़े। 
 
आला अधिकारियों का रवैया भी ढीला 
बांदा। लाक डाउन का पालन कराने के लिए जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल अपने मातहत अधिकारियों को लगातार निर्देशित कर रहे हैं। पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ शंकर मीणा ने भी अपने मातहतों के पेंच कसे हैं, लेकिन यह नाकाफी साबित हो रहा है। आला अधिकारियों को चाहिए कि वह अपने मातहतों को बिल्कुल सख्त रहने की हिदायत दें। किसी को भी घर से बाहर नहीं निकलने दिया जाए। सुबह 6 बजे से 9 बजे तक की जो छूट है, उस दौरान बाजार में सोशल डिस्टेंसिंग का हर हाल में पालन कराया जाए, वरना पूरी मेहनत पर पानी फिरना तय है। 
इस तरह पैदल अपने घरों को लौट रहा परदेशियों का जत्था
 
लाक डाउन का सातवां दिन: उड़ रहीं धज्जियां 
बांदा। देशव्यापी 21 दिवसीय लाकडाउन के दिन जैसे-जैसे गुजरते जा रहे हैं, वैसे-वैसे लोग लाक डाउन का उल्लंघन करते हुए अपने घरों से बाहर निकल रहे हैं। पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद लोग अपने घरों से बाहर निकल रहे हैं। सड़क पर पुलिस का वाहन निकलने पर लोग दुबक जाते हैं और पुलिस का वाहन निकल जाने के बाद लोग फिर से सड़क पर आ जाते हैं। तमाम छोटी-बड़ी दुकानें अंदरखाने चैबीसों घंटे खुली हैं। पुलिस लाक डाउन का पालन नहीं करा पा रही हैं। मंगलवार को लाकडाउन के सातवें दिन लोग अपने घरों से बाहर निकले और लाक डाउन के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियां उड़ाईं। चैराहों पर तैनात पुलिस भी हलाकान हो गई है। इसके चलते वह भी सुस्त नजर आ रही है। 

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