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जिला अस्पताल में एक हजार लोगों की स्क्रीनिंग

तीन संदिग्धों लोगों को राजकीय मेडिकल कालेज भेजा गया 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । दिल्ली, नोएडा, हैदराबाद और अन्य महानगरों से घर लौटे परदेशियों को जिला अस्पताल लाया गया। इनकी संख्या तकरीबन एक हजार है। रविवार को तड़के से शुरू हुआ स्क्रीनिंग का सिलसिला शाम तक जारी है। स्क्रीनिंग के दौरान तीन कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीज मिले हैं। इन मरीजों को एंबुलेंस के जरिए राजकीय मेडिकल कालेज भेजा गया है। कोरोना वायरस को लेकर महानगरों से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग किए बिना नहीं छोड़ा जा रहा है। 

 जिला अस्पताल कैंपस स्थित ट्रामा सेंटर में स्क्रीनिंग के लिए लाइन में लगे परदेशी 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश व्यापी लाक डाउन के आवाहन पर लोग अपने घरों में कैद हैं। परदेश में रह रहे लोगों के लिए संबंधित गवर्नमेंट के द्वारा वाहनों का इंतजाम किया गया है। तमाम लोग तो वाहनों से आए हैं जबकि तमाम लोग पैदल चलकर शहर पहुंचे हैं। जो लोग बसों के द्वारा आए हैं उन्हें सीधे जिला अस्पताल ले जाया गया, जबकि जो लोग पैदल आए हैं वह अपने घर जाने के पूर्व अस्पताल पहुंचे। स्क्रीनिंग ड्यूटी में लगे डाक्टर और कर्मचारियों ने बताया कि शनिवार तड़के से शुरू हुआ स्क्रीनिंग का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। ड्यूटी में तैनात मेडिकल आफिसर डा. विनीत सचान ने बताया कि करीब एक हजार से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। इनमें तीन लोग सर्दी, जुकाम, बुखार से पीड़ित पाए गए हैं। उन्हें मेडिकल कालेज रेफर कर दिया गया है। बाकी लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। 

सोशल डिस्टेसिंग की उड़ी धज्जियां 
बांदा। कोरोना वायरस को लेकर सतर्कता की तमाम कड़ियां हैं। इनमें सोशल डिस्टेंसिंग अहम है। लेकिन जिला अस्पताल में परदेश से लौटे मजदूरों और कामगारों की स्क्रीनिंग के काम में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ रही हैं। तकरीबन एक मीटर के फासले पर एक व्यक्ति को खड़ा किया जाना चाहिए, लेकिन अफसोस कि यहां तो एक-एक फुट की दूरी भी नहीं हो पा रही है। स्क्रीनिंग के लिए लाइन में लगे लोग एक-दूसरे से चिपके खड़े हुए हैं। ऐसे में कोरोना वायरस के संक्रमण की कड़ी केा तोड़ पाना कहां तक मुमकिन होगा। 

बार्डरों में लगाई गई मेडिकल टीम, लेखपाल भी डटे 
बांदा। दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद समेत अन्य महानगरों से अपने वतन को लौटने वाले परदेशियों को बार्डर पर ही रोककर पहले स्क्रीनिंग की जा रही है और उनके नाम पता रजिस्टर में नोट किए जा रहे हैं। जिले के बार्डरों पर प्रशासन की ओर से एक मेडिकल टीम और दो लेखपालों को लगाया गया है। कोई भी बस यात्रियों को लेकर बार्डर पर पहुंचती है तो पहले बस में सवार यात्रियों की स्क्रीनिंग की जाती है, नाम पता रजिस्टर में दर्ज करने के बाद चेकिंग के आधार पर मरीजों को अस्पताल भेजा जा रहा है। 

पुलिस ने युवक को घर से उठाया, अस्पताल में कराया भर्ती 
बांदा। शहर के बिजलीखेड़ा मुहल्ला निवासी वीरेंद्र (19) हैदराबाद में रहकर पढ़ाई करता है। वह शनिवार को ही अपने घर आया। मोहल्लेवासियों को जानकारी हुई तो लोगों ने 108 एंबुलेंस को जानकारी दी। एंबुलेंस के पहुंचने के बाद भी युवक घर से नहीं निकला। एंबुलेंस में तैनात कर्मचारियों ने पुलिस को सूचना दी। काफी देर बाद मौके पर पहुंचे पुलिस कर्मियों ने युवक को घर से बाहर निकलवाया और एंबुलेंस के जरिए उसे जिला अस्पताल भिजवाया। मुहल्ले के लोगों को यह शक था कि वीरेंद्र कोरोना वायरस से संक्रमित तो नहीं है। 

62 मजदूरों को घरों से अस्पताल लाई 108 एंबुलेंस 
बांदा। परदेश से लौटने के बाद चुपचाप अपने घरों में दुबक जाने वाले 62 कामगारों को शनिवार रात तक 108 एंबुलेंस के द्वारा राजकीय मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल लाया गया। यह सभी कामगार परदेश से अपने घर पहुंच गए थे और बिना जांच-पड़ताल के ही चुपचाप रह रहे थे। ग्रामीणों के द्वारा सूचनाएं देने पर पुलिस की मदद से 108 एंबुलेंस के जरिए इन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। वहां पर इन सबकी स्क्रीनिंग की गई और बाद में घर जाने दिया गया। कोई भी संदिग्ध मरीज नहीं मिला है। 

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