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विदेशो में बाबा पृथ्वी सिंह ने जगायी भारत माता की आजादी की अलख

हमीरपुर, महेश अवस्थी । प्राचार्य डा. भवानीदीन ने कहा कि बाबा पृथ्वी सिंह आजाद उन क्रान्तिकारियों मे से एक थे जिन्होने आजादी की लम्बी लडायी लडी। वे गदर पार्टी के संस्थापको मे से एक थे। उन्हे जब लाहौर में फांसी की सजा सुनायी गयी जो बाद में उम्र कैद में बदल गयी। आजाद ने विदेशो में रहकर भारत के लिए पूरे मनो योग से अलख जगायी और प्रशिक्षण पाने के लिए वे अफगानिस्तार से पैदल चलकर सोवियत यूनियन मे जाकर लेनिन से मिले थे। वे केवी शिवहरे महाविद्यालय सिसोलर मंे जिनका देश ऋणी है विशयक कार्यशाला
कार्यशाला में बोलते हुए डा. भवानीदीन
मंे एक जिंदा शहीद बाबा पृथ्वी सिंह आजाद पर बोल रहे थे। उन्होने कहा कि बाबा के दिल में बचपन से ही देश प्रेम की ज्योति जल रही थी। वे अपने पिता के साथ रंगून पहुंचे और भारत में गदर फैलाने के लिए अपने क्रान्तिकारियों के साथ वापस आये थे लाहौर षणयन्त्र केस में 65 क्रान्तिकारियों पर मुकदमा चला। 24 क्रान्तिकारियों को फांसी की सजा सुनायी गयी। इनमें से 7 क्रान्तिकारियों को सजा ए मौत मिली। 17 को उम्र कैद मिली थी। बाबा का 5 मार्च 1989 को निधन हो गया। चन्द्रशेखर आजाद के साथ रहने के कारण पृथ्वी सिंह ने अपने नाम के आगे आजाद शब्द जोड लिया था। डा. श्याम नारायण, डा. लालताप्रसाद, कुलदीप यादव, आलेाक राज, देवेन्द्र त्रिपाठी, आनन्द विश्वकर्मा ने विचार रखे, संचालन डा. रमाकान्त कर रहे थे। 

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