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लॉकडाउन में बेवजह निकले लोग बने मुर्गा, पंचर की गई गाड़ियां

कानपुर में लॉकडाउन के दूसरे दिन मंगलवार सुबह फौरी राहत देने के बावजूद लोग नहीं माने। जब बेधड़क ये लोग सड़कों पर निकले तो पुलिस ने भी नायाब तरीका अपनाया। जाजमऊ में बेवजह घर से निकले लोगों को एक लाइन से मुर्गा बनाया और हाथ ऊपर करवाके खड़ा करा दिया। वहीं, कल्याणपुर में पुलिस ने बाइक व कारों को पंचर कर दिया।
आमजा भारत संवाददाता:- ताकि सड़कों पर लोग न दिखाई दें लेकिन देर रात तक लोग निकलते रहे। पुलिस कार्रवाई करती रही। प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार लॉकडाउन में सुबह छह से 11 बजे तक आवश्यक चीजों की खरीदारी का समय तय किया गया था। डीआईजी अनंत देव ने बताया कि इसके बाद जो लोग सड़क पर निकले उन पर कार्रवाई की गई।
खासकर उन लोगों पर जो बगैर किसी कारण घर से बाहर निकले। जाजमऊ में ट्रेनी आईपीएस सूरज कुमार राय के नेतृत्व में बैरिकेडिंग लगाकर चेकिंग शुरू की गई। कुछ देर में घूमनों वालों की लाइन लग गई। आईपीएस ने सभी को एक कतार में खड़ा कर दिया और फिर मुर्गा बना दिया। यही नहीं कुछ अन्य लोगों से उठक-बैठक करवाई। इसी तरह पूरे शहर में चेकिंग, चालान और लोगों को चेतावनी देकर रोका गया।
मैं समाज का दुश्मन हूं..जो घर से निकला
डीआईजी अनंत देव के आदेश पर शहर पुलिस ने तरह-तरह के पोस्टर तैयार किये हैं। इसमें लिखा है कि मैं समाज का दुश्मन हूं, जो बेवजह घर से निकला हूं और मास्क नहीं लगाया है। पुलिस लोगों को रोक-रोक कर पोस्टर हाथों में थमाकर फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर वायरल कर रही थी।
पंचर कर दी बाइक और कार  
मंगलवार को चौराहे पर ट्रेनी आईपीएस निखिल पाठक सीओ कल्याणपुर अजय कुमार पुलिस बल के साथ दिन भर डटे रहे। यहां पर पुलिस बेवजह घर से निकलने वालों की बाइकें और कारें पंचर करने का अभियान चलाया। 73 बाइकें और 45 कारें पंचर कीं।
पुलिस पर पीटने का आरोप 
स्वरूपनगर निवासी एडवोकेट व ट्रैवेल्स एजेंसी के मालिक धीरज चड्ढा ने बताया कि वह मंगलवार को करीब सवा 11 बजे पत्नी के साथ बाइक से बैंक में किश्त जमा करने गुमटी जा रहे थे। आरोप है कि मोतीझील में पुलिसकर्मियों ने उनको रोका तभी एक दरोगा ने उनसे अभद्रता की और फिर थप्पड़ जड़ दिये। आरोप ये भी कि पुलिसकर्मियों ने उनकी पत्नी से भी अभद्रता की। एसपी पश्चिम डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि मामले की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाए।
तबीयत खराब का बहाना 
जहां भी पुलिस लोगों को रोक रही थी, अधिकतर यही कह रहे थे कि उनकी तबीयत खराब है। कुछ किसी अन्य की तबीयत खराब होने का हवाला दे देखने जाने की बात कहते नजर आए। हालांकि पुलिस ने केवल उनको ही जाने दिया जिनके पास वाजिब कारण और उससे संबंधित दस्तावेज थे।

लोगों पर किसी तरह का बल प्रयोग नहीं किया जा रहा है। इसलिए अन्य तरीके अपनाए जा रहे हैं, जिससे लोग घर से बेवजह न निकलें।
अनंत देव, डीआईजी

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