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कोरोना वायरस :- मां के दिल में था गोद में तड़प रहे बेटे का दर्द

यूं ही नहीं माताएं अपने लाल को जंग के लिए बार्डर पर भेज देती हैं। कलेजे के टुकड़े से बड़ा देश को समझती हैं और यहां की माटी की सीरत भी यही है। अब जब प्रधानमंत्री के आह्वान पर पूरा देश एकजुट होकर कोरोना वायरस से जंग लड़ रहा है तो घायल मासूम को गोद में लेकर एक मां इलाज के लिए करीब पौन घंटे तक उर्सला अस्पताल में भटकती रही। मगर, उस मां को कोई गिला-शिकवा नहीं था। उन्हें देश के दर्द के आगे, अपने तड़प रहे बच्चे का दर्द कम लगा।
कानपुर आमजा भारत सवांददाता:- बोलीं, देश के लिए लॉकडाउन जरूरी है। शुक्लागंज निवासी सुनील जायसवाल का प्रिंटिंग का काम है। बुधवार को उनका छह साल का बेटा संस्कार छत पर खेलने के दौरान 10 फीट नीचे गिरने से घायल हो गया। कमर के निचले हिस्से में चोट आई है।

इन हालातों में मां पद्मिनी मासूम बेटे को गोद में लेकर उर्सला अस्पताल पहुंचीं। ओपीडी बंद होने से उन्हें डॉक्टर तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। करीब पौन घंटे तक भटकने के बाद डॉक्टर ने बच्चे को देखा तो एक्सरे कराने को कह दिया।

हालांकि उनके साथ चार-पांच लोग थे, सभी अलग-अलग स्कूटी से। इसी बीच 11 बजे की समय सीमा खत्म हो गई। तो बेटे को गोद में उठाए पद्मिनी अस्पताल से करीब एक किमी दूर मेस्टन रोड स्थित एक पैथोलॉजी पैदल पहुंचीं। ऐसे हालातों में भी स्वजनों ने सोशल डिस्टेंसिंग यानी सामाजिक दूरी का ध्यान रखा और सभी एक-दूसरे से एक मीटर दूर रहे। एक्सरे से पता चला कि बच्चे की जांघ की हड्डी टूट गई है।

कच्चा प्लास्टर करके बच्चे को घर भेज दिया। पद्मिनी से लॉकडाउन के चलते हुईं दिक्कतों को लेकर जब सवाल किया गया तो उनका जवाब दिल में उतर गया। उन्होंने कहा, ‘मेरा बेटा घायल है, निश्चित तौर पर दु:खी हूं। मौजूदा हालातों में समस्याएं और बढ़ गई हैं, लेकिन मेरे दर्द से बड़ा दर्द कोरोना के रूप में देश में मुंह बाए खड़ा है। इस समय देश संकट में है और ऐसे में लॉकडाउन बेहद जरूरी हैं।’

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