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आरबीएसके ने प्रिया को दिया नया जीवन

झांसी मेडिकल कालेज में हुआ न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का मुफ्त आपरेशन
जन्मजात विकृति से छुटकारा पाने से प्रिया के परिवार वालों में खुशी 
फोटो नंबर-03:  
बांदा, कृपाशंकर दुबे । राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के प्रयासों से जनपद की एक और बच्ची को नया जीवन मिला है। कमासिन ब्लाक के पन्ना गाँव निवासी ज्ञान कुमार की करीब ढाई  माह की बच्ची प्रिया न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (दिमाग या रीढ़ की हड्डी के असामान्य विकास से जुड़ी अति-गंभीर जन्मजात विकृति) से ग्रसित थी। 15 मार्च को झाँसी मेडिकल कॉलेज में आरबीएसके के तहत प्रिया की सफल सर्जरी हुई है। बच्ची को कुछ दिन के लिए अस्पताल में ही निगरानी में रखा जा रहा है। जल्दी ही उसे घर भेज दिया जाएगा। 
आरबीएसके के नोडल अधिकारी डॉ. आरएन प्रसाद ने बताया कि वर्ष 2019-20 में जनपद में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट के तीन  मामले चिन्हित किये गए जिनमें से दो की सफल सर्जरी निशुल्क कराई जा चुकी है जबकि एक सर्जरी होनी बाकी है। पिछले वर्ष भी न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट के दो बच्चों की मुफ्त सर्जरी करायी गयी थी । उन्होंने
आपरेशन के बाद स्वस्थ मासूम बच्ची प्रिया
बताया कि भ्रूण के दिमाग या रीढ़ की हड्डी से जुड़ाजन्म दोष यानि न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट बेहद गंभीर जन्मजात विकृति है। इसके दो मुख्य प्रकार स्पाइना बाइफिडा और एनेनसीफेली हैं। स्पाइना बाइफिडा में न्यूरल ट्यूब पूरी तरह बंद नहीं हो पाती जिससे सिर के पीछे या रीढ़ की हड्डी में उभरी हुई गांठ या सूजन दिखाई देती है। ऐसे बच्चों को तुरंत उपचार की जरूरत होती है, नहीं तो बच्चे की जान भी जा सकती है। समय से इलाज न मिलने पर वह मानसिक या शारीरिक रूप से विकलांग भी हो सकता है। वहीँ एनेनसीफेली में दिमाग में विकार होने से अधिकांश दिमाग अविकसित रह जाता है जिससे या तो बच्चा जन्म के बाद मर जाता है या मृत बच्चा जन्म लेता है। इसका इलाज संभव नहीं है। 

पहली तिमाही में फोलिक एसिड लेना है अनिवार्य 
बांदा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. संतोष कुमार ने बताया कि अधिकतर जन्मजात दोषों का मुख्य कारण गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में फोलिक एसिड की कमी होना है। खासतौर पर न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट गर्भ में पल रहे भ्रूण को गर्भावस्था के पहले माह में ही हो जाता है। इसलिए गर्भवती महिला को पहली तिमाही में फोलिक एसिड की पर्याप्त मात्रा का सेवन अनिवार्य रूप से करना चाहिए। इसके अलावा पौष्टिक आहार और विटामिन भी उचित मात्रा में लेने से जन्मजात विकृतियों की सम्भावना को कम किया जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान मधुमेह, मोटापे और शराब के सेवन से भी बचना चाहिए। यदि पिछली गर्भावस्था में बच्चे में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट की विकृति हुई है तो अगले गर्भधारण में अधिक सावधान रहने और नियमित जांच, अल्ट्रासाउंड आदि करवाना चाहिए।  

विश्व में हर साल तीन लाख शिशु हो रहे न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट के शिकार 
बांदा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व में हर साल लगभग तीन लाख शिशु न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट के कारण मृत्यु या आजीवन विकलांगता के शिकार हो रहे हैं। वहीँ यदि गर्भवती महिला गर्भावस्था की शुरुआत में फोलिक एसिड का अतिरिक्त सेवन करे तो न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट के खतरे को 60 से 70 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। 

परिजनों ने जताया आभार  
बांदा। सर्जरी के बाद प्रिया के परिजन बेहद खुश हैं। पिता ज्ञान कुमार का कहना है दृ “आरबीएसके टीम ने हमारी बहुत मदद की। इनके बिना हमें अपनी बच्ची के इलाज के लिए न जाने कहाँ-कहाँ भटकना पड़ता” उन्होंने बताया कि मेरी पत्नी ने 22 दिसंबर 2019 को कमासिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बच्ची को जन्म दिया था। बच्ची की कमर में एक उभरी हुई गाँठ थी जिसे देख बड़ी चिंता हुई। इसके बाद एएनएम के जरिये आरबीएसके टीम से संपर्क किया। चिकित्सा अधिकारी डा. राजेश ने हमारे घर आकर बच्ची प्रिया का स्वास्थ्य परीक्षण किया और न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट की पुष्टि कर फौरन सर्जरी करवाने को कहा। आरबीएसके टीम ने सभी औपचारिकताएं पूरी करवाई जिसके बाद 15 मार्च को झाँसी मेडिकल कॉलेज में प्रिया की निशुल्क सर्जरी हुई है।

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