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महिलाओं के साथ हिंसा की घटनाएं चिंताजनक

हिंसामुक्त भारतीय समाज पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। सामाजिक विकास संस्थान एवं जगदगुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्व विद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में हिंसा मुक्त भारतीय समाज विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ हुआ।
कार्यक्रम का उद्घाटन जगदगुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो योगेश चन्द्र दुबे व मानिकपुर विधायक आनन्द शुक्ला ने सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलित कर किया। राष्ट्रीय संगोष्ठी का परिचय देते हुये डाॅ विनोद शंकर सिंह ने महिलाओं पर हो रही हिंसात्मक घटनाओं के बारे में बताया कि महिलाओं के साथ घर, कार्य क्षेत्र, रेल और बस स्टेशन में छेडछाड व हिंसात्मक घटनायें हो रही हैं। प्रो केके सिंह ने बताया कि आधुनिक युग में परिवार में हिंसा एवं बढता अपराध प्रमुख समस्या है। भारतीय समाज को हिंसा मुक्त बनाने के लिये आश्रय की व्यवस्था होनी चाहिये, क्योंकि अधिकतर महिलायें घरेलू हिंसा व अत्याचार का शिकार होती है। जिसके लिये आश्रय की व्यवस्था सरकार या स्वैच्छिक संगठनों द्वारा की जानी चाहिए। ताकि स्थायी और सुरक्षित महसूस कर सकें। समाजसेवी जयश्री जोग ने बताया कि महिलाओं के प्रति हिंसा, बालात्कार, घर में ताने मारना आदि हिंसा की घटनाएं चिंताजनक हैं। महिला जागृति मण्डल की सरस्वती ने बताया कि नारी
गौरव, अभिमान है, नारी ही महान है। महिलाओं को अपनी रक्षा करने के लिये स्वंय राम बनना पडेगा। प्रधानमत्री मातृत्व वन्दना योजना की जिला समन्वयक डाॅ सुरभि गुप्ता ने बताया कि समाज में हिंसा रजिस्टर्ड हो गई है। महिलाओं को स्वयं आगे बढकर हिंसा का विरोध करना होगा और प्रयास कर दोषी को सजा दिलाना चाहिए। मानिकपुर विधायक आनन्द शुक्ला ने बताया कि समय बदल रहा है और समाज में चेतना लाना होगा। महिलाओं के बिना समाज में कोई चेतना नहीं ला सकता। कुलपति प्रो योगेशचन्द्र दुबे ने बताया कि महिलायें हर क्षेत्र में पुरुषों को मात दे रही हैं और आगे बढ रही हैं। इतिहास में महिलाओं को पुरुषों के बराबर का दर्जा और सम्मान् मिलता था, परन्तु आज के समय में महिलाओं के साथ भेदभाव, हिंसा और अन्य समस्याओं का सामना करना पडता है। डाॅ स्वर्णलता शर्मा ने बताया कि किसी भी प्राणी पर हिंसा न करना मनुष्य का परम धर्म है। बताया कि हिंसा के तीन प्रकार होते हैं मनसा, वाचक और कर्म। इन तीनों प्रकार के कार्याे को न करना अहिंसा में आता है। अभियान संस्था से अशोक कुमार ने कहा कि समाज में महिलाओं के साथ हिंसा क्यों हो रही है इसके बारे में सेाचना चाहिये। आज समाज भौतिकवादी और प्रयोगवादी दो वर्गो में बंट गया है। बीच में जो स्थान खाली हुआ है उसने हिंसा का रुप ले लिया है। इस मौके पर डीन सामाजिक विज्ञान डाॅ विनोद मिश्रा, कुलसचिव डाॅ महेन्द्र कुमार उपाध्याय, वित अधिकारी आरपी मिश्रा, डाॅ मनोज पाण्डेय, पीआरओ एसपी मिश्रा आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ गोपाल मिश्र ने किया। 

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