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ओला गिरने से जमीन पर टूटकर गिरीं फसलें

मौसम के बिगड़ने मिजाज से बेचैन हो उठा किसान 

बबेरू, कृपाशंकर दुबे । सुबह अचानक आसमान में धुन्ध छा गई और बडे बडे ओले गिरने से सडक से लेकर खेतों में सफेदी छा गई। दलहन तिलहन की फसले ओलों के चपेट से जमीन में टूट कर गिर पडी। फसलों का भारी नुकसान हुआ। जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरे खिंच गई है।
शुक्रवार को सुबह 10 बजे के लगभग अचानक मौसम का मिजाज बदला और आसमान में धुन्ध छा गई। मौसम का मिजाज कोई समझ नही पाया। अचानक बडे बडे ओले गिरने लगे। खेतों की रखवाली कर रहे किसान मजदूर पेडों की छांव की ओर भागे। 10 मिनट तक प्रकृति ने अपना कहर ढा दिया। जिससे सडक से लेकर खेतों
बबेरू क्षेत्र में गिरे ओले की तस्वीर
में सफेदी छा गई। दलहन तिलहन की फसले ओलों की चपेट से टूट टूट कर खेतों में फैल गई। चना, मसूर,
ही, अलसी की फसलों को भारी क्षति हुई है। देवरथा, पल्हरी, अहार, बडागांव, आलमपुर, बगेहटा, हरदौली, अछाह, जुगरेहली, बबेरू, पून, उमरहनी, इंगुवा, भभुवा, करहुली, मर्का, सांडा, मऊ आदि गांव ओला के चपेट से किसान बर्बादी की कगार में पहुंच गया। ग्राम अछाह के बृद्व किसान जीपी सिंह पटेल, सांतर गांव के प्रगतिशील किसान गोपालशरण सिंह, करहली के अवधेश पटेल, भभुवा के सनद ंिसह, मर्का के ननकूराम यादव ने बताया कि दलहन तिलहन के अलावा खेतों में खडी फसल गेंहू, चना, लाही, अलसी, अरहर सभी का भारी नुकसान हुआ है। किसान महंगाई और दैविय आपदा की मार से पहले टूट चुका है। लेकिन अचानक बेमौसम बारिस कई बार होने से किसानों की चिंता बढ गई थी। परन्तु शुक्रवार को हुई ओला के साथ बारिस से सभी फसले को क्षति हुई है। कडी मेहनत कर फसलों को तैयार किया था वही पकने  की स्थित में पहुंची तो ओला और बेमौसम बारिस ने किसानों के अरमानों में पानी फेर दिया। किसान दैवीय आपदा एवं प्रकृति की मार से तंगहाली में खडा हो गया है। भगवान ने अब साथ नही दिया तो किसान पूरी तरह से टूट जाएगा। 

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