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Friday, March 6, 2020

विशाखा समिति गठित कर महिलाओं के अधिकारों की हो रक्षाः श्रीवास्तव

अब पीड़ित महिलाओं को थाने में जाने की आवश्यकता नहीं
बेटी को अच्छी शिक्षा दिलाकर आर्थिक रूप से मजबूत बनायेंःडा. अवधेश सिंह

उरई (जालौन), अजय मिश्रा । महिलाओं के कार्य स्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम के उपाय बनाये गये हैं। एक्ट 2013 के संदर्भ में विस्तार से जानकारी देते वूमेन इम्पावरमेंट फाउण्डेशन के संस्थापक एवं प्रेसिडेंट रतन कुमार श्रीवास्तव पूर्व डीआईजी ने कहा कि महिलाओं के कार्य स्थल पर होने वाले किसी भी तरह के यौन उत्पीड़न को रोकने के लिये बना कानून बहुत ही सख्त है। जरूरत है कि पीड़ित महिला अपनी आवाज उठाये।
वह शुक्रवार को दयानंद वैदिक काॅलेज उरई के सेमिनार हाॅल में महिला सशक्तीकरण संगोष्ठी कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महिलाओं के उत्पीड़न के मामले में महिलाओं को ही थाने जाना पड़ता था। लेकिन उनकी सहूलियत के लिये जिस संस्थान में वह काम कर रही है उस संस्था का यह दायित्व है कि वह विशाखा समिति बनाये जिससे महिलाओं के अधिकारों की रक्षा हो सके। इस समिति को यह अधिकार है कि वह जो भी फैसला करेगी उसे कोर्ट के आदेश की तरह मानना ही पड़ेगा। खास बात यह है कि
संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के साथ ग्रुप में खड़े लोग।
समिति की प्रमुख महिला ही होगी। समिति जो कार्यवाही करेगी उसे गुप्त रखा जायेगा। विशिष्ट अतिथि अवधेश सिंह अपर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पुत्र और पुत्री दोनों को जन्म देने वाली महिला मां ही है। मां को लड़कों को यह संस्कार देना चाहिये कि वह किसी भी लड़की को अपने परिवार के सदस्य के रूप में देखें तो महिला उत्पीड़न के मामले कम होंगे। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रही डा. रेनू चंद्रा ने कहा कि हर मां को अपनी बेटियों को यह समझाना चाहिये अगर उससे कोई छेड़खानी करता है या यौन उत्पीड़न करता है तो बदनामी के डर से इसे दबाने की जरूरत नहीं है बल्कि न्याय के लिये आवाज उठाने की जरूरत है। डा. चंद्रा ने कहा कि हर मां-बाप को चाहिये कि वह अपनी बेटी को अच्छी शिक्षा दें ताकि वह अपने पैरों पर खड़ी होकर आर्थिक रूप से मजबूत हो जाये इससे उसकी आवाज में बुलंदी आ जायेगी।
संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि एवं अवैतनिक मंत्री प्रबंधकारिणी कमेटी डा. देवेंद्र कुमार, एडीआर के प्रदेश समन्वयक अनिल शर्मा, संस्था के उपाध्यक्ष एवं विशिष्ट अतिथि रंगकर्मी अनिल सिंदूर, प्राचार्य डीवीसी डा. तारेश भाटिया, शिक्षिका सारिका आनंद, अलका अग्रवाल सहित अनेकों लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर डा. आनंद खरे, डा. रामकिशोर गुप्ता, डा. विजय यादव, डा. राजेश पांडेय, डा. राजेश पालीवाल, डा. माधुरी रावत, डा. नीरज द्विवेदी, ने भी विचार व्यक्त किये। संगोष्ठी में अनेकों छात्र-छात्राओं ने मुख्य अतिथि से सवाल भी पूंछे जिसका उन्होंने विस्तार से जबाब दिया। डा. अलका रानी पुरवारने कार्यक्रम का संचालन एवं डा. शैजला गुप्ता ने आभार प्रदर्शन किया।

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