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लॉकडाउन: घर पहुंचने की चाह में जान हथेली पर रख कर रहे सफर

कानपुर आमजा भारत सवांददाता:- कोराना वायरस से बचाव के लिए पूरे देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा के बाद हड़कंप मचा हुआ है। सभी को अपने अपने घरों को जाना है। घर जाने के लिए साधन नहीं मिल रहे हैं तो लोग पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर के किसी भी हालत में घर पहुंचना चाहते हैं।
लखनऊ से 8 घंटे में पैदल पहुंचे घर
कानपुर के अर्मापुर निवासी राजेंद्र कुमार, अमन, चमन व प्रिंस लखनऊ में पेंटर का काम करते हैं। ये 17 फरवरी को गए थे। पिछले चार दिनों से काम बंद होने पर शुक्रवार को ठेकेदार ने खाना-पीना देने से मना कर दिया। शनिवार सुबह 4:00 बजे पैदल घर के लिए चल दिए और 12:00 बजे अपने घर पहुंच गए।
गुड़गांव से चले हैं पुलिस परेशान कर रही है
उन्नाव निवासी संदीप कुमार, धीरज कुमार, रायबरेली निवासी सौरभ यादव व शिवम कुमार गुड़गांव की एक प्लास्टिक फैक्ट्री में हेल्पर हैं। नौबस्ता हाईवे पर संदीप ने बताया कि गुरुवार को चारों लोग घर के लिए निकले थे। रास्ते में जगह-जगह रोककर पुलिस परेशान कर रही है। रायबरेली के सौरभ ने बताया कि पुलिस ने हम लोगों की कोई मदद नहीं की।
दिल्ली से फैजाबाद पैदल जा रहे मजदूर
दिल्ली से फैजाबाद पैदल जा रहे छह मजदूरों ने शनिवार को कल्याणपुर क्रॉसिंग के पास बताया कि ठेकेदार के हाथ खड़े करने के बाद 26 मार्च की शाम को दिल्ली से रवाना हुए हैं। मजदूरी नहीं मिली तो जेब में पैसा भी नहीं है। रास्ते में कई बार पुलिस ने पूछा लेकिन कोई मदद नहीं की। रास्ते में कुछ लोगों ने खाना खिलाया। 20 वर्षीय मजदूर अर्जुन ने बताया कि दिल्ली और नोएडा में मजदूरी करते हैं।
दिल्ली से फैजाबाद पैदल जा रहे मजदूर
फैजाबाद के तारूल गांव के रहने वाले हैं। संजय ने बताया कि दिल्ली में मजदूरी करते हैं। लॉकडाउन की वजह से ठेकेदार ने हाथ खड़े कर दिए हैं। हम सब दिल्ली से पैदल फैजाबाद जा रहे हैं। लवकुश ने बताया कि 26 मार्च की शाम को दिल्ली से पैदल रवाना हुए थे। कई जगह रुकते हुए कानपुर तक पहुंचे हैं। थकान बहुत है, लेकिन घर पहुंच कर ही आराम करूंगा।

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