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कुण्डौरा में महिलाओं के पास होती है होली की कमान

बुन्देलखण्ड की इकलौती होली जिसमें वर्जित है पुरूष का प्रवेश

हमीरपुर, महेश अवस्थी । जिले में 586 स्थानो पर होलिका दहन होगा। इनमें से 23 संवेदनशील और 6 अतिसंवेदनशील स्थल है जहंा पर अतिरिक्त पुलिस फोर्स लगा दी गयी है। बसंत पंचमी से निर्धारित स्थानो पर होलिका दहन के लिए डांढ रख दिया जाता है। जिसमें गांव के युवक रोजना थोड़ा थोड़ा करके अनावश्यक पेड पौध डालते है। जिसमें होलिका की रात को गांय के गोबर के कंडे पाथकर जलाये जाते है। इसी के साथ रंग और गुलाल की होली शुरू हो जाती है। जिले में सुमेरपुर विकासखण्ड के कुण्डौरा गांव में सिर्फ महिलायें होली खेलती
होली खेलती गांव की महिलायें
है जहां पर पुरूषो का आना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। यहां तक की छोटे बच्चे भी यहां नही जा सकते। इस होली की शुरूआत 40 सालपहले तब हुयी थी जब गांव के ही डकैत मेंबर सिंह ने अपनी ही बिरादरी के युवक को गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस गम में गांव में होली नही खेली गयी। तब महिलाओं ने होली का त्योहार हंसी खुशी से मनाने का निर्णय लिया। तब से यह परम्परा लगातार हर साल मनायी जाती है। गांव के रामजानकी मंदिर के पास पूरे गांव की महिलायें एकत्रित होती है। फिर रंग गुलाल के साथ वे रोग हुडदंग मचाती है। अगर धोखे से कोई युवक पहुच जाये तो उसकी कोडे़ से पिटायी की जाती है। बुन्देलखण्ड में यह होली की अनोखी परम्परा है। जिसकी कमान सिर्फ महिलाओं के पास होती है। होली खेलने वाले स्थल पर न आदमी पहुंच सकता है और न आदिम जात।

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