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उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन में हावी रहीं अव्यवस्थाएं

डीआईओएस ने दिए मूल्यांकन में सावधानी बरतने के निर्देश

बांदा, कृपाशंकर दुबे । हाईस्कूल और इंटरमीडिएट उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य पहले दिन अधूरी तैयारियों की भेंट चढ़ गया। मूल्यांकन केंद्रों में पहले दिन कुछ उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन हो सका। शहर में कुल तीन मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं। डीआईओएस ने प्रधान परीक्षकों व परीक्षकों की बैठक लेकर कापियों के मूल्यांकन कार्य में सावधानी बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी परीक्षार्थी का अहित न हो। 
आदर्श बजरंग इंटर कालेज में सोमवार को डीआईओएस विनोद सिंह ने प्रधान परीक्षकों व परीक्षकों की बैठक में निर्देश दिए कि बिना किसी भय और लालच के बोर्ड के मानकों के अनुरूप मूल्यांकन करते हुए निर्धारित अंक प्रदान करें। अंक स्पष्ट होने चाहिए। कापी के ऊपर शब्दों और अंकों में प्राप्तांक लिखें। एक मुश्त अंक न देकर खंड के अनुसार अंक दें। गलत उत्तर को काटकर शून्य अंक अवश्य लिखें। कोई भी प्रश्न या उसका खंड
उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करते चिकित्सक
अमूल्यांकित न छोड़ें। उत्तर पुस्तिका के मुख्य व अंतिम पृष्ठ पर परीक्षक अपने हस्ताक्षर और परीक्षक संख्या अवश्य अंकित करें। एवार्ड ब्लैंक में गोलों को नीले या काले पेन से सावधानी से भरें। गोले को अधूरा न भरें। काटे गए उत्तर को भी यदि अतिरिक्त नहीं है तो उसमें भी अंक दें। कापियों को जांचते समय मोबाइल का प्रयोग वर्जित रहेगा। कोई भी परीक्षक मोबाइल का प्रयोग न करे। उप नियंत्रक इस बात का विशेष ख्याल रखें। नंबरों को जोड़ते समय विशेष सावधानी रखें। जांच के दौरान नंबर गलत पाए गए तो पारिश्रमिक से कटौती की जाएगी। उप नियंत्रकध्प्रधानाचार्य मेजर मिथलेश कुमार पांडेय ने कहा कि सभी परीक्षकों को कोरोना वायरस से बचाव का ध्यान रखते हुए शुचितापूर्ण मूल्यांकन करें। उधर, शहर के तीन मूल्यांकन केंद्रों राजकीय इंटर कालेज, आदर्श बजरंग इंटर कालेज और डीएवी इंटर कालेज में मूल्यांकन कार्य पहले दिन अधूरी तैयारियों की भेंट चढ़ गया। मूल्यांकन केंद्रों में पहले दिन कुछ उत्तर पुस्तिकाओं को जांच कर उप प्रधान परीक्षकों और सहायक परीक्षकों ने मूल्यांकन की रस्म अदायगी की। पहले दिन मूल्यांकन कार्य न होने की एक वजह और सामने आई है। कई मंडलों से अभी तक कई विषयों की कापियां नहीं आ सकी हैं। इससे कई विषयों के परीक्षकों के  जांचने के लिए कापियां ही नहीं थीं। इससे पहले दिन का मूल्यांकन सुस्त रहा है। 

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