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पहले खुद टीबी को दी मात, अब सात और को टीबी मुक्त करने की ली जिम्मेदारी

प्रोजेक्ट अक्षय ने दिखाई राह
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मिला निशुल्क इलाज 
विश्व टीबी दिवस पर विशेष

बांदा, कृपाशंकर दुबे । महुआ ब्लाक के रिसौरा गांव निवासी 58 वर्षीय टीबी रोगी राममिलन ने न सिर्फ टीबी का सरकारी इलाज लेकर इस गंभीर बीमारी को मात दी है, बल्कि अब वे डाट्स सेंटर के माध्यम से सात अन्य मरीजों को भी प्रतिदिन दवा देकर रोगमुक्त होने में मदद कर रहे हैं। 
राममिलन बताते हैं कि दो वर्ष पहले मुझे टीबी हुई थी। कई जगह इलाज कराने पर भी कुछ खास आराम नहीं मिला। जुलाई 2019 में प्रोजेक्ट अक्षय के समुदाय वालंटियर हमारे घर आए और लक्षणों के अनुसार मेरी जांच करवाई। टीबी की पुष्टि होने पर सरकारी अस्पताल से मेरी निशुल्क दवा शुरू कराई और इलाज पूरा होने तक मुझे रोज दवा खाने को कहा। मैंने डाक्टर के परामर्श पर छह माह तक पूरा इलाज लिया। अब मैं बिलकुल ठीक
हूं पर मुझे लगता है अपने क्षेत्र के अन्य टीबी रोगियों को भी इसके बारे में जागरुक करना मेरी जिम्मेदारी है। इसलिए मैं डाट्स प्रोवाइडर बन सात अन्य मरीजों को भी टीबी की दवा दे रहा हूं। 
गौरतलब है कि टीबी उन्मूलन पर काम कर रहे प्रोजेक्ट अक्षय ने राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के सहयोग से जनपद के कई टीबी रोगियों को रोगमुक्त हो जीवन की नई राह दिखाई है। जिला समन्वयक अतुल गुप्ता बताते हैं कि प्रोजेक्ट अक्षय समुदाय से टीबी रोगियों को चिन्हित कर क्षय उन्मूलन कार्यक्रम से जोड़ने में महत्वपूर्ण कड़ी का काम कर रही है ताकि पीड़ित व्यक्तियों को उत्तम व निशुल्क इलाज मिल सके। इसके साथ ही संस्था टीबी रोगियों का संवेदीकरण कर उन्हें अधिक जिम्मेदार नागरिक बनाने का प्रयास भी कर रही है।

कोरोना: टीबी मरीज रखें खास ख्याल 
बांदा। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. बीपी वर्मा का कहना है कि टीबी रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने और फेफड़े पहले से ही प्रभावित होने के कारण इन्हे कोरोना से बचाव के लिए अधित जागरुक रहने की आवश्यकता है। टीबी एक संक्रामक बीमारी है जिसका सबसे अधिक प्रभाव फेफड़ों पर पड़ता है। वहीं कोरोना का वायरस भी सबसे पहले फेफड़ों को ही प्रभावित करता है। टीबी रोगियों को चाहिए कि वे इस समय बेवजह घर से बाहर न निकलें। विदेश से आए यात्रियों से संपर्क में आने से बचें। घर से बाहर निकलते समय मुंह को ढककर रखें तथा इधर-उधर न थूकें। कोई भी समस्या होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं या विशेषज्ञ से सलाह लें। उन्होंने बताया कि रोगियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्षय रोग विभाग द्वारा उन्हें बचाव संबंधी जरूरी सन्देश दिए गए हैं। वहीं सभी डाट्स प्रोवाइडर को निर्देश दिए गए हैं कि वे टीबी मरीजों को अगले एक हफ्ते तक की दवाइयां एडवांस में दे दें, जिससे उन्हें हर रोज घर से बाहर न निकलना पड़े। साथ ही फोन पर उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछते रहें। 

टीबी से जुड़े जनपद के आंकड़े 
बांदा। टीबी कार्यक्रम के जिला कार्यक्रम समन्वयक प्रदीप वर्मा ने बताया कि जनपद में जनवरी 2019 से दिसंबर 2019 तक साधारण टीबी के 3624 जबकि एमडीआर के 298 मरीज थे। वहीं जनवरी 2020 से अभी तक साधारण टीबी के 614 व एमडीआर के 63 नए मरीज मिले हैं।    

कोरोना से टीबी के रोगी को बचाने के उपाय 
- हाथों को दिन में कई बार साबुन से अच्छी तरह धोएं, सेनेटाइजर का प्रयोग करें।
- मास्क पहनें या हर बार खांसते या छींकते समय मुँह को रुमाल या टिश्यू से कवर करें।
- भीड़-भाड़ वाली और अस्वच्छ जगहों पर जाने से बचें।
- मरीज हवादार और अच्छी रौशनी वाले कमरे में रहे।
- पौष्टिक भोजन और नियमित व्यायामध् योग करें।
- बीड़ी, सिगरेट, तम्बाकू, शराब आदि का सेवन न करें। 
- मरीज एक प्लास्टिक बैग में थूके और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद करके उसे डस्टबिन में दाल दें। यहां-वहां न थूकें।
- दो हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर डाक्टर को दिखाएँ। दवा का पूरा कोर्स लें। डाक्टर से बिना पूछे दवा बंद न करें।







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