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भाजपा नेता ने लेखपाल पर लगाया रिश्वत और भ्रष्टाचार का आरोप

भाजपा नेता से लेखपाल ने लिए पट्टे के नाम पैसे

माधौगढ़ (जालौन), अजय मिश्रा । रिश्वत और भ्रष्टाचार की इंतहा देखिए! कि लेखपाल ने भाजपा के पूर्व जिला मंत्री से पट्टे की रशीद के नाम पर मोटी रिश्वत ऐंठी, उसके बाद काम भी नहीं किया। तो भाजपा नेता ने पैसे मांगे लेकिन बैखौफ! लेखपाल ने तीन साल बाद नौ हजार रुपये देकर जबरन सादा कागज पर हस्ताक्षर करा लिये। पूरा मामला एसडीएम के पास पहुंचा तो उन्होंने पैसे वापिस मिलने पर संतोष जाहिर करते हुए बात को खत्म करने को कहा, पर मंडल अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह सेंगर के पहुंचने से मामला राजनैतिक होता देख जांच तहसीलदार को सौंप दी। पर सवाल यह है कि सब कुछ आईने की तरह साफ है तो लेखपाल के भ्रष्टाचार पर कार्यवाही क्यों नहीं?
पीड़ित भाजपा नेता।
मामला गोहन का है, जहां भाजपा के पूर्व जिला मंत्री राजकुमार कुशवाहा से तत्कालीन लेखपाल निशा यादव ने पट्टे की रसीद के नाम पर 22000 रुपये लिए लेकिन काम नहीं होने के बाद भाजपा नेता ने पैसे की मांग तो लेखपाल ने बहाने बना दिए। काफी शिकायतों के बाद लेखपाल निशा यादव ने तहसील में भाजपा नेता को 9000 रुपए वापस किए और जबरन सादा कागज पर हस्ताक्षर कर पैसे देने की वीडियो क्लिप बनाई। पूरे मामले पर भाजपा नेता ने एसडीएम शालिकराम को लेखपाल की करतूत के बारे में बताया। पहले तो उन्होंने पैसे वापिस मिल गए तो अच्छा है,कहकर मामले को खत्म करने को कहा लेकिन राजनैतिक पेंच फंसता देखा तो तहसीलदार को लेखपाल की जांच सौंप दी। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जब लेखपाल ने पैसे वापस किए तो रिश्वत लेने की पुष्टि हुई है न, इससे ज्यादा पुख्ता सबूत और क्या चाहिए ? कार्रवाई के लिए। फिर भी एसडीएम ने पूरे मामले को हल्के में लेकर संजीदगी नहीं दिखाई। इससे तो स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार चरम पर है और योगी सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को पलीता लगा रहे हैं। जबकि निशा यादव की तैनाती के बाद से कई शिकायतें  रही हैं। अभी कुछ दिन पूर्व असहना में भी फसल खराब होने के सर्वे पर पैसे मांगने की बात सामने आई थी और आवासीय प्रकरण पर भी पैसे न मिलने पर ग्रामीण को मानसिक रूप से उत्पीड़न करने का मामला आया था। बावजूद कार्रवाई और जांच के निशा यादव को अधिकारियों द्वारा अभयदान दिया जा रहा है।

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